मशहूर व्यंग्यकार और लेखक केपी सक्सेना का बृहस्पतिवार सुबह राजधानी के एक निजी अस्पताल में निधन हो गया।
वह पिछले दो महीने से महानगर एक्टेंशन के आस्था हॉस्प्टिल में ओरल कैंसर के चलते भर्ती थे।
लगान, जोधा अकबर, हलचल और स्वदेश जैसी फिल्मों में संवाद लिखने वाले सक्सेना के निधन पर साहित्य और राजनीति से जुड़े लोगों ने गहरा दुख जताया।
उन्हें सन् 2000 में पद्म श्री से नवाजा गया था। बीबी नातियों वाली सीरियल से उनको देशव्यापी ख्याति मिली थी।
प्रमुख हिंदी अखबारों और पत्रिकाओं में अपने चुटीले और धारदार व्यंग्य के कारण वो अरसे से पाठकों के चहेते रहे।
और भी बहुत है जानने को
बरेली में 1934 में जन्मे कालिका प्रसाद सक्सेना, केपी नाम से लोकप्रिय हुए। वे पचास के दशक में लखनऊ आए थे। केपी ने बॉटनी में एमएससी किया और लखनऊ क्रिश्चियन कॉलेज में लैक्चरर रहे। उन्होंने ग्रेजुएट के लिए बॉटनी विषय पर एक दर्जन से ज्यादा किताबें लिखी हैं। वे रेलवे की सर्विस के दौरान लखनऊ के स्टेशन मास्टर भी रहे।
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उन्होंने वॉलेंटरी रिटायरमेन्ट ले लिया था। आकाशवाणी, दूरदर्शन और मंच के लिए लिखे गए 'बाप रे बाप' और 'गज फुट इंच' नाटकों के अलावा दूरदर्शन के लिए लिखा गया धारावाहिक 'बीबी नातियों वाली' विशेष रूप से उल्लेखनीय है।
केपी के लिखे इस सीरियल को देश का पहला हिन्दी का 'सोप ओपेरा' होने का गौरव हासिल है। यह सीरियल इतना लोकप्रिय हुआ कि पब्लिक डिमांड पर इसके आगे के एपीसोड भी लिखने पड़े।