आजादी की लड़ाई के दौरान लखनऊ बोस की बहादुरी का भी गवाह रह चुका है। बात उस समय की है जब सुभाष चंद्र बोस त्रिपुरी में आयोजित कांग्रेस के अधिवेशन में कांग्रेस के अध्यक्ष पद से त्यागपत्र दे चुके थे। अली सरदार जाफरी और उनके साथियों ने 12 अक्तूबर 1939 को लखनऊ में ऑल इंडिया स्टूडेंट फेडरेशन का यूपी शाखा का कार्यक्रम तय किया।
इन लोगों के बुलावे पर सुभाष चंद्र बोस लखनऊ आए। कार्यक्रम अमीनाबाद स्थित गंगा प्रसाद मेमोरियल हॉल में आयोजित था। उन्होंने काफी जोरदार भाषण दिया। उनका भाषण सुनने के लिए अमीनाबाद में खचाखच भीड़ थी। क्रांति आंदोलन : कुछ अधखुले पन्ने के एक प्रसंग से पता चलता है, ‘उन्होंने ओज भरे स्वरों में कहा, ‘आजादी मांगी नहीं जाती है और हम उसे हासिल करके रहेंगे।’
इस घोषणा को कुछ ही मिनटों में खुफिया अफसरों ने संयुक्त प्रांत के तत्कालीन चीफ सेक्रेटरी मिस्टर गिबन तक पहुंचा दिया। इस घोषणा ने अंग्रेजों को अंदर तक झकझोर दिया था। चीफ सेक्रेटरी ने तुरंत गृह सचिव को बुलाया और उनसे सलाह मशविरा करके सुभाष की गिरफ्तारी का फैसला किया। उस समय कानून था कि जो व्यक्ति विलायत में रह चुका है उसकी गिरफ्तारी केवल अंग्रेज या एंग्लो-इंडियन पुलिस अफसर ही कर सकते हैं।