राष्ट्रीय सेवा योजना से जुड़ने के बाद साइमा नसीम की जिंदगी में ऐसा बदलाव आया कि अब वह सामाजिक सरोकारों से खुद को अलग नहीं कर पा रही है। टीम के अलावा वह स्वतंत्र रूप से भी जरूरतमंद लोगों की मदद के लिए निकल पड़ती है। साइमा का मानना है कि हर किसी को किसी न किसी रूप में समाज के हित में अपना योगदान देना चाहिए। इसी तरह से ही हम समाज में बदलाव ला सकते हैं।
साइमा नसीम हीरालाल यादव बालिका डिग्री कॉलेज की बीए तृतीय वर्ष की छात्रा है। ज्यादा समय नहीं हुआ। बात करीब एक साल पहले की ही है जब वह राष्ट्रीय सेवा योजना से जुड़ी, उसके बाद उसकी जिंदगी के मायने ही बदल गए। राष्ट्रीय सेवा योजना के अंतर्गत टीम के साथ उसने कई शिविरों में भाग लिया और लोगों को जागरूक करने का काम किया।
अब वह स्वतंत्र रूप से भी काम करती है। पढ़ाई के साथ वह स्कूली बच्चों को ट्यूशन पढ़ाती है। उसकी कक्षा में कई ऐसे बच्चे हैं जो आर्थिक रूप से कमजोर हैं और ट्यूशन की फीस का खर्चा वहन नहीं कर पाते उन्हें निशुल्क पढ़ाती है। उसकी इसी भावना की वजह से वह बच्चों के बीच लोकप्रिय हो चुकी है।
इसके अलावा वह बालिकाओं के सशक्तिकरण के मुद्दे पर भी काम करती है। बस्ति व मोहल्लों जाकर बालिका विवाह, बालिका शिक्षा, दहेज प्रथा के प्रति लोगों को जागरूक करती है। वह लोगों को बालिकाओं को पढ़ाने पर बल देती है। बेटी पढ़ेगी तो पूरा समाज बदलेगा, परिवार समृद्ध होगा। जेंडर सेंसीटाइजेशन पर भी वह कई कार्यशाला कर चुकी है। बालक हो या बालिका दोनों को एक समान अवसर मिले, इसी बात पर बल देती है।