डिनर में वे हल्के क्रीम कलर का सूट पहने हुए थे, जिस पर लाल टाई थी। वह पूरी तरह शांत थे। उनके चेहरे पर कहीं से ऐसा नहीं लग रहा था कि वह तनाव में हैं। पर, जापान नहीं चाहता था कि देश के इस महान कर्मयोगी, अदम्य देशप्रेमी और क्रांति के अनोखे पुजारी को कैदी के रूप में हमें (ब्रिटेन को) सौंपा जाए।
इसलिए उसने सोवियत यूनियन के प्रधानमंत्री मार्शल जोसफ स्टालिन को सुभाष चंद्र बोस को अपने यहां रूस में प्रवेश देने को राजी कर लिया। बोस को जापानी जहाज से रूसी सीमा तक लाया गया और फिर वहां से जीप से वह रूसी सीमा में प्रवेश कर गए। जापान को इसकी जानकारी भी दी गई।’
यह सुनते ही डॉ. संपूर्णानंद के आंखों में आंसू छलक आए। इसके बाद एटली ने डॉ. संपूर्णानंद के कान में धीरे से कुछ कहा उसके बाद डॉक्टर साहब का चेहरा खिल उठा और होठों पर मुस्कराहट भी आ गई। पर, पता नहीं वह क्या बात थी। जो कभी इस मुख्यमंत्री की जुबान पर नहीं आई।