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सेहत की बात: किडनी में चोट लगने से हो सकती हाइपरटेंशन की समस्या, बचाव और उपचार के लिए जानें डॉक्टर की सलाह

Sun, 10 Nov 2024 12:01 PM IST
भूपेन्द्र सिंह अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ

सार

किडनी में चोट लगने से हाइपरटेंशन की समस्या हो सकती है। आगे पढ़ें और बचाव व उपचार के लिए डॉक्टर की सलाह जानें...
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किडनी - फोटो : Adobe stock
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विस्तार
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राजधानी लखनऊ में केजीएमयू के अटल बिहारी वाजपेई साइंटिफिक कन्वेंशन सेंटर में भारतीय ट्रॉमा एवं तीव्र देखभाल सोसाइटी के 14वें वार्षिक और उत्तर प्रदेश चैप्टर का दूसरा सम्मेलन हुआ। इसमें  सर्जन प्रो. हरविंदर पाहवा ने कहा कि दुर्घटना में बुरी तरह से घायल होने वाले व्यक्ति को एक साल तक सेकेंडरी हाइपरटेंशन की जांच करानी चाहिए। कई बार किडनी पर चोट लगने से हाइपरटेंशन की समस्या होती है। यह सामान्य हाइपरटेंशन से ज्यादा खतरनाक है। समय से पता चलने पर इसका इलाज संभव है।
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उन्होंने कहा, आधुनिक तकनीक से किडनी संबंधित सर्जरी भी आसान हो गई हैं। पहले पूरा गुर्दा निकालना पड़ता था। अब दूरबीन विधि से सर्जरी हो जाती है। ऐसा माना जाता है कि विभिन्न दुर्घटना के दौरान सिर व हड्डी में चोट ज्यादा आती है। जबकि पेट में विशेषकर लिवर व किडनी की चोट भी गंभीर हो सकती हैं। इस पर ध्यान देने की जरूरत है।

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शराब और मोबाइल फोन हादसे की बड़ी वजह

केजीएमयू ट्रॉमा सर्जरी विभाग के अध्यक्ष डॉ. संदीप तिवारी के मुताबिक सड़क दुर्घटना के लिए मोबाइल फोन व शराब पीकर वाहन चलाना सबसे बड़ी वजह हैं। सभी डॉक्टरों को ट्रॉमा संबंधी प्रशिक्षण अनिवार्य रूप से देना चाहिए। हर मरीज को समय से ट्रॉमा सेंटर पहुंचाना संभव नहीं है। ऐसे में उन्हें प्राथमिक इलाज मिल जाएगा तो लोगों की जान बचाई जा सकेगी।

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समय पर इलाज जरूरी

डॉ. समीर मिश्र ने कहा, मरीजों को बेहतर इलाज उपलब्ध कराने के लिए जिलास्तर पर मेडिकल कॉलेज व ट्रॉमा सेंटरों की स्थिति को और बेहतर करने की जरूरत है। ताकि मरीजों को घटना के तुरंत बाद प्राथमिक इलाज मिले व जांचें हो सके। समय-समय पर डॉक्टर व पैरामेडिकल स्टाफ को ट्रॉमा मैनेजमेंट का प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए।

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बड़ी स्वास्थ्य समस्या है ट्रॉमा

कार्यक्रम का शुभारंभ उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने किया। उन्होंने कहा, ट्रॉमा एक बड़ी स्वास्थ्य समस्या है, जो मुख्य रूप से युवाओं को प्रभावित करती है। सरकार ट्रॉमा टीमों को हर संभव सहायता प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है, और यदि आवश्यक हुआ तो हम मौजूदा नियमों में बदलाव करने के लिए भी तैयार हैं। विशिष्ट अतिथि मयंकेश्वर शरण सिंह ने कहा, एमबीबीएस छात्रों और युवा डॉक्टरों को सही समय पर प्रशिक्षण देना बहुत जरूरी है। प्रो. एमसी मिश्रा ने मुख्य अतिथि को धन्यवाद देते हुए ट्रॉमा देखभाल में सुधार के लिए अपने सहयोग की प्रतिबद्धता दोहराई।
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