लखनऊ। रसोईं गैस की किल्लत से राजधानी में संकट बढ़ा है, मगर किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) पर इसका असर नहीं है, क्योंकि यहां की रसोई पूरी तरह सौर ऊर्जा से संचालित है।
संस्थान के प्रवक्ता प्रो. केके सिंह ने बताया कि केजीएमयू में रोजाना करीब साढ़े चार हजार मरीजों का खाना बनाया जाता है। यह काफी पहले से ही सौर ऊर्जा पर आधारित है। इससे रसोई गैस सिलिंडरों पर निर्भरता काफी कम हो गई है। इस परियोजना से न केवल ऊर्जा की बचत हो रही है, बल्कि संस्थान के परिचालन खर्च में भी कमी आई है।
लोहिया संस्थान में तीन दिन का स्टॉक, हो रही व्यवस्था
डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान के प्रवक्ता प्रो. भुवन चंद्र तिवारी के अनुसार, संस्थान में रोजाना करीब एक हजार मरीजों का भोजन पकाया जाता है। इसमें गैस का इस्तेमाल होता है। फिलहाल यहां तीन दिन की गैस ही बची है। हालांकि, वेंडर ने इसका बंदोबस्त करने की बात कही है।
सरकारी अस्पतालों में स्थिति सामान्य
डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी, बलरामपुर और लोकबंधु जैसे अस्पतालों में खाना पकाने के लिए गैस का ही इस्तेमाल होता है। हालांकि, कहीं भी गैस की कोई किल्लत नहीं है। सरकारी अस्पताल होने से यहां गैस की आपूर्ति पर्याप्त है।
केजीएमयू में लगा सोलर पैनल।