केजीएमयू के डॉक्टर अब अंगदान को बढ़ावा देने के लिए अन्य सरकारी व निजी अस्पतालों में भी जागरूकता अभियान चलाएंगे। केजीएमयू की टीम विभिन्न अस्पतालों में भर्ती ब्रेन डेड मरीजों के परिवारीजनों को अंगदान के लिए प्रेरित करेगी। अंगदान से गंभीर मरीजों की जान बचाई जा सके, इसके लिए जरूरी है कि ब्रेन डेड मरीजों का उनके परिवारीजन अंगदान कराएं। शासन ने केजीएमयू को अंगदान के नेतृत्व की जिम्मेदारी सौंपी है।
मौजूदा समय में केजीएमयू में ही अंगदान कार्यक्रम चल रहा है। ब्रेन डेड मरीजों के अंगदान से मिले अंग गंभीर मरीजों को लगाकर उनकी जान बचाई जा रही है। लिवर व कॉर्निया ट्रांसप्लांट तो केजीएमयू में किया जाता है जबकि किडनी को पीजीआई व दिल्ली के चिकित्सा संस्थानों में भेज दिया जाता है। ऐसे कई मरीज हैं जिनका लीवर व किडनी खराब हैं, मगर डोनर न होने के कारण वे जिंदगी की जंग दवाओं के सहारे लड़ रहे हैं। आंकड़े बताते हैं कि राजधानी के सरकारी व निजी अस्पतालों में सड़क हादसों के ऐसे मरीज हैं, जिनका मस्तिष्क काम नहीं कर रहा है। ये ब्रेन डेड की श्रेणी में हैं। अगर उनके परिवार वाले अंगदान को राजी हो जाएं तो दूसरे गंभीर मरीजों को नया जीवन मिल सकता है। केजीएमयू के सीएमएस डॉ. एसएन शंखवार का कहना हे कि अंगदान को बढ़ावा देने के लिए अभियान के तहत काम किया जाएगा।