निकाली गई त्वचा को स्किन बैंक में प्रिजर्व करने से पहले एड्स, हेपेटाइटिस बी एवं सी, टीबी, पीलिया, स्किन कैंसर, त्वचा की बीमारी और सेप्टीसीमिया आदि की जांच की जाती है। इसके बाद ही इसे प्रत्यारोपण के योग्य माना जाता है। इन बीमारियों से पीड़ित व्यक्ति अपनी त्वचा दान नहीं कर सकते हैं।
बर्न यूनिट स्थापित होने के बाद आई तेजी
केजीएमयू में बर्न यूनिट स्थापित होने के बाद से स्किन बैंक बनाने के काम में तेजी आई है। बर्न यूनिट में भर्ती काफी मरीजों को त्वचा प्रत्यारोपण की जरूरत होती है। संस्थान में जनवरी 2021 से ही बर्न यूनिट की शुरुआत हुई है। यहां पर भर्ती मरीजों को भी त्वचा की जरूरत होती है। अभी तक प्रदेश के किसी संस्थान मेें स्किन बैंक की व्यवस्था नहीं है। स्किन बैंक स्थापित होने के बाद त्वचा प्रत्यारोपण का काम आसान हो जाएगा। स्किन बैंक स्थापित करने की लागत 50 से 60 लाख रुपये आने का अनुमान है।
कार्यपरिषद ने दी मंजूरी
केजीएमयू के प्रवक्ता डॉ. सुधीर सिंह ने बताया कि विवि की कार्य परिषद ने स्किन बैंक को मंजूरी दे दी है। इसे स्थापित करने की प्रक्रिया चल रही है। उम्मीद है कि जल्द ही यह प्रक्रिया पूरी होने के बाद लोगों को स्किन बैंक के माध्यम से त्वचा प्रत्यारोपण की सुविधा मिलने लगेगी।