केजीएमयू प्रशासन तीन दिन की हड़ताल के दौरान भेंट चढ़ी 31 मरीजों की मौत का दाग जूनियर डाक्टरों के दामन पर न लगने देने की जोड़तोड़ में जुटा है।
इसके चलते ही कोर्ट के निर्देश पर गठित हाई पावर कमेटी की जांच रिपोर्ट आने से पहले ही केजीएमयू प्रशासन ने अपनी आंतरिक जांच कमेटी की रिपोर्ट जारी कर जानबूझ कर पूरे मामले में भटकाव पैदा करने के लिए केजीएमयू में कोई हड़ताल न होने का नया शिगूफा छेड़ा है। हालांकि प्रशासन के इस दावे की कलई खुद उसके द्वारा हड़ताल तिथि पर तैयार मरीजों की ओपीडी व भर्ती के आंकड़े खोल रहे हैं।
अब मेडिकल विवि के कुलपति से लेकर मुख्य चिकित्सा अधीक्षक तक इस बात का जवाब देने से बच रहे हैं कि अगर 30 मई से एक जून तक जूनियर डाक्टरों की हड़ताल नहीं थी तो फिर इन तीन दिनों में केजीएमयू में आने वाले ओपीडी मरीजों व ट्रॉमा सहित वार्डों में भर्ती होने वाले मरीजों की संख्या में अचानक सामान्य दिनों के अपेक्षा बड़ी गिरावट कैसे आई।