जहरीली शराब का कहर इस कदर बरपा कि पीड़ितों के आगे यहां केजीएमयू के ट्रॉमा सेंटर में सारे इंतजाम कम पड़ गए। इसके बावजूद डॉक्टरों की टीम जी-जान से पीड़ितों के इलाज में जुटी रही। यहां एक-एक बेड पर दस मरीज तक भर्ती किए गए और सबको जरूरी इलाज मुहैया कराया गया।
समय पर इलाज मिलने से कई जिंदगियां बच गई। हालत सुधरी तो हर कोई धरती के भगवान का शुक्रिया अदा करता नजर आए तो कोई जिंदगी की लड़ाई जीतने के बाद अपनों की गोंद में फफक कर रोता नजर आया।
मलिहाबाद में जहरीली शराब पीने से बीमार हुए लोगों का ट्रॉमा सेंटर आने का सिलसिला सोमवार तड़के शुरू हो गया था, जो देर शाम तक चलता रहा। लेकिन डॉक्टर जान बचाने के लिए हर मोर्चे पर तैयार नजर आए और वे कामयाब भी हुए।
कोई भी मरीज ऐसा नहीं बचा जिसकी नब्ज पर डॉक्टरों ने हाथ नहीं रखा हो। आपदा प्रबंधन वार्ड में ड्यूटी पर तैनात डॉ.आलोक पांडे ने बताया कि पहली प्राथमिकता पीड़ितों को बेसिक ट्रीटमेंट देना है जिससे उनके शरीर के भीतर मौजूद जहर को निकाला जा सके।
110 मरीजों को बचा लिया गया
करीब 110 मरीजों के शरीर से जहरीली शराब निकाल दी गई है। हालांकि इससे उनके अंगों को कितना नुकसान हुआ है इसके लिए क्रेटनीन और एल्ब्युमिन की जांच कराई जा रही है ताकि आने वाले खतरों को कम किया जा सके।
डॉ. पांडे ने बताया कि जिन मरीजों को वेंटिलेटर पर रखा गया है, उनकी हालत बेहद नाजुक है। उन्हें लिवर, किडनी, आंख और हृदय को काफी नुकसान हुआ है। ऐसे में उनके बारे में कुछ कह पाना मुश्किल है। वेंटिलेटर यूनिट में सैफापुर के महेश प्रसाद (55), निर्मल कुमार (40), शिव (41), राम प्रसाद (55), सजीवन लाल (58) और नरेश (53) को भर्ती किया गया है।
ट्रॉमा सेंटर के डॉक्टरों का कहना है कि आपदा प्रबंधन वार्ड में भर्ती 36 मरीजों में 10 की हालत नाजुक बनी हुई है, जिसमें अरौरा के सजीवन, राकेश, कैलाश चंद्र, नवनीत और दिलीप शामिल हैं। इन मरीजों ने धांधुला दिखाई देने की शिकायत की है। डॉक्टरों ने बताया कि अधिक शराब पीने से आंखों की रोशनी जाने का भी खतरा है लेकिन 12 से 14 घंटे बाद स्थिति कुछ स्पष्ट हो पाएगी।
नहीं बदली गई शिफ्ट
ट्रॉमा सेंटर में जहरीली शराब से पीड़ितों के दर्द और कराह के आगे डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ को शिफ्ट बदलने का मौका नहीं मिला। ट्रॉमा के प्रभारी डॉ. एसएन शंखवार ने बताया कि आपदा को देखते हुए 50 से अधिक जूनियर डॉक्टर, 10 से अधिक सीनियर डॉक्टर, 50 नर्सिंग स्टाफ और 50 से अधिक वार्ड ब्वॉय लगाए गए हैं। हालात नाजुक होने के कारण शिफ्ट तक नहीं बदली जा सकी, जो डॉक्टर सुबह शिफ्ट खत्म कर के गए हैं, वे भी अस्पताल लौट आए हैं।
स्वास्थ्य मंत्री अहमद हसन ने सोमवार शाम साढ़े पांच बजे ट्रॉमा सेंटर का दौरा किया और मरीजों का हालचाल लिया। उन्होंने डॉक्टरों से भी मरीजों की जानकारी ली।
इसके बाद हसन आपदा वार्ड पहुंचे। वहां पर उन्होंने भर्ती मरीजों के परिवारीजनों से मामले की जानकारी ली। इसके बाद उन्होंने डॉक्टरों को बढ़िया इलाज देने के लिए कहा। इस दौरान ट्रॉमा के प्रभारी समेत अन्य अधिकारी मौजूद रहे।