एमबीबीएस सीट पर एडमिशन के नाम पर लाखों की वसूली करने वाले डॉ. के. पी. सिंह और डॉ. डी. के. कटियार को सस्पेंड कर दिया गया है। ये जानकारी शुक्रवार सुबह चीफ प्रॉक्टर एस एन कुरील ने दी।
इस मामले में निजी मेडिकल कॉलेजों में डोनेशन देकर और फिर केजीएमयू की 65 सीटों पर प्रवेश के नाम पर लोगों से जमकर वसूली की गई।
बच्चों को डॉक्टर बनाने का सपना देखने वाले अभिभावकों को जब ठगे जाने का अहसास हुआ तो पूरा मामला खुला।
यहां से शुरू हुआ मास्टरमाइंड प्लान
सीपीएमटी-2014-15 सत्र में सुप्रीम कोर्ट ने पांच निजी मेडिकल कॉलेजों को राजकीय शुल्क पर प्रवेश के आदेश दिए थे।
कहा था कि स्टेट मेरिट के हिसाब से प्रवेश लिया जाए। प्रवेश लेने वाले अभ्यर्थियों की सूची एमसीआई और सुप्रीम कोर्ट को दी जाए।
धंधा मंदा देखकर चार कालेजों ने जीरो सेशन करने में ही अपनी भलाई समझी।
जबकि बाराबंकी बार्डर पर स्थित एक मेडिकल कॉलेज ने प्रवेश शुरू कर दिए।
इसमें राजकीय फीस के अलावा डोनेशन लेने की शिकायतें चिकित्सा शिक्षा विभाग को मिली थीं।
वसूली का अड्डा बना केजीएमयू
एमबीबीएस में एडमिशन दिलाने के नाम पर केजीएमयू में पूरा गैंग है।
लाखों रुपये की वसूली करने वाले इस गैंग के सदस्यों के नाम एक-एक कर सामने आए हैं।
पहले तो निजी मेडिकल कॉलेजों में डोनेशन देकर और फिर केजीएमयू की 65 सीटों पर प्रवेश के नाम पर लोगों से जमकर वसूली की गई।
ऐसे चला जालसाजी का खेल
नोएडा में बाकायदा एक ऑफिस खोला गया। जिसे रजत गुप्ता और हिमानी चला रहे थे।
डॉ. डी.के. कटियार के नाम पर ये वहां बैठकर एमबीबीएस में प्रवेश कराने का ठेका लेते थे।
13 सितंबर को नोएडा का ऑफिस बंद होने के बाद जब पैसा देने वालों के हाथ पांव फूलने शुरू हुए तो सभी की तलाश शुरू हुई।
एडवांस पैसा लेने वालों के मोबाइल फोन बंद हुए तो लोग केजीएमयू के वेबसाइट देखकर डॉ. डी.के. कटियार तक पहुंचने लगे।
इसके बाद पूरे मामले का भंडाफोड़ हो गया। पूरे मामले खुलासा हुआ तो पता चला कि फार्माकोलॉजी विभाग के डॉ. डी.के. कटियार के नाम का इस्तेमाल माइक्रोबॉयोलॉजी विभाग के डॉ. के.पी. सिंह ने किया।
डॉ. कटियार ने स्वयं पुलिस को इस मामले में अपना पक्ष प्रस्तुत किया है।
माइक्रोबायो विभाग पर भी लगा दाग
माइक्रोबॉयोलॉजी विभाग के अन्य चिकित्सक का नाम भी इस मामले में सामने आ गया।
सीओ स्तर के एक अधिकारी इस चिकित्सक के संपर्क में थे और पैसा वापस करने का दबाव बना रहे थे। ऐसा न करने पर जेल भेजने की धमकी भी दी गई थी।
हालांकि डॉक्टर ने अभी पैसा वापस नहीं किया है।
सीपीएमटी में भी लगी थी ड्यूटी
डॉ. डी.के. कटियार और डॉ. के.पी. सिंह की ड्यूटी सीपीएमटी-2014 में भी लगायी गई थी।
पहली बार परीक्षा निरस्त होने के बाद दोबारा फिर उन्हें ड्यूटी दी गई।
जबकि डॉ. के.पी. सिंह कई मामलों में पहले थी संदिग्ध रहे हैं। केजीएमयू के प्रशासनिक भवन में हुए अग्निकांड में भी इनकी भूमिका पायी गई थी।
बच्चों को डॉक्टर बनाने की चाह में ठगे गए मां-बाप
अपने बेटे-बेटियों को डॉक्टर बनाने की चाह में मां-बाप के लाखों रुपये ठग लिए गए।
ठगे गए लोगों को अपनी पहुंच दिखाने के लिए उन्हें केजीएमयू में बुलाया गया।
वहां के चिकित्सकों के कमरे, डीन कार्यालय और गेस्ट हाउस का भी इस्तेमाल हुआ। जिससे किसी को शंका न हो।
नोएडा से लेकर लखनऊ तक अलग-अलग जगहों पर रुपये वसूले गए।
डॉ. डी.के. कटियार के नाम से खेल खेला गया। कभी राहुल गुप्ता तो कभी रजत गुप्ता तो कभी अखंड प्रताप सिंह के नाम से लोगों को काम हो जाने की सांत्वना दी गई।
एमबीबीएस में प्रवेश के नाम पर धंधा कर रहे चिकित्सकों के रैकेट ने अपने धंधे को फुलप्रूफ बनाने के लिए कुछ ऐसे ही खेल खेला।