केजीएमयू ने नए निर्माण, योजनाओं और उपकरणों की खरीद के लिए शासन को एक हजार करोड़ रुपये से ज्यादा का बजट भेजा है। वहीं, दूसरी ओर वह गरीब, नि:शक्त और असाध्य रोग से पीड़ितों को मुफ्त दवाइयां-उपकरण और अन्य सामग्री देने के लिए आए बजट का पूरा इस्तेमाल तक नहीं कर सका है। केजीएमयू प्रशासन पिछले वित्तीय वर्ष में शासन से मिले बजट में से 42 करोड़ रुपये खर्च नहीं कर पाया है। ऐसे में यह रकम लौटानी पड़ी है।
केजीएमयू में ज्यादातर इलाज का शुल्क लगता है। हालांकि, बीपीएल, विपन्न, अन्त्योदय, असाध्य, आयुष्मान, जननी सुरक्षा, प्रधानमंत्री कोष, मुख्यमंत्री कोष, सांसद और विधायक निधि से मिलने वाली रकम से इलाज के साथ दवाएं और उपकरण भी निशुल्क उपलब्ध कराए जाते हैं। इनके लिए केजीएमयू को विशिष्ट बजट के साथ शासन की ओर से भी एकमुश्त राशि उपलब्ध कराई जाती है। वित्तीय वर्ष 2021-2022 में केजीएमयू को शासन से 1041.68 करोड़ रुपये स्वीकृत हुए थे, लेकिन इसमें से 998.35 करोड़ रुपये ही जारी हुए। हालांकि, केजीएमयू इसका भी पूरा उपयोग नहीं कर सका है। इसमें से केजीएमयू 956.35 करोड़ रुपये ही खर्च कर पाया है। खर्च न कर पाने की वजह से बचे 42 करोड़ रुपये वापस करने पड़े।
इंडेंट से मिली दवाओं के लिए एक से डेढ़ महीने का इंतजार
केजीएमयू में असाध्य और नि:शक्त मरीजों के साथ ही स्टाफ को मुफ्त दवाएं और उपकरण उपलब्ध कराए जाते हैं। ये दवाएं उपलब्ध न होने पर इंडेंट जारी करके एजेंसी के माध्यम से इन्हें मंगवाकर देने की व्यवस्था है। इस व्यवस्था का आलम यह है कि एक से डेढ़ महीने तक मरीज दवा और उपकरण के लिए इंतजार करते हैं। इनमें कैंसर और अन्य गंभीर रोगों से पीड़ित भी शामिल होते हैं। कई बार तो मरीज के ऑपरेशन की तारीख आ जाती है, लेकिन उन्हें दवाएं या उपकरण नहीं मिल पाते हैं।
एक महीने से फिल्म खत्म होने से एक्सरे व अन्य जांचें प्रभावित
केजीएमयू में एक महीने से ज्यादा समय से एक्स-रे और सीटी स्कैन आदि में इस्तेमाल होने वाली फिल्म नहीं है। इसकी वजह से मरीजों को जांच शुल्क जमा करने के बावजूद लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। वैकल्पिक व्यवस्था के रूप में डीवीडी पर जांच रिपोर्ट दी जा रही है, लेकिन हर डॉक्टर और मरीज के लिए यह रिपोर्ट सुविधाजनक नहीं है। ऐसे मरीजों की लंबी फेहरिस्त है जो फिल्म आने का इंतजार कर रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि केंद्रीकृत व्यवस्था के बाद ही व्यवस्था पटरी से उतरी है।
एचआरएफ स्टोर पर सन्नाटा, बाहर से लिखी जा रहीं दवाएं
केजीएमयू में हॉस्पिटल रिवॉल्विंग फंड की 19 दुकानें हैं। इनसे दवाएं बाहर बेचे जाने की पुष्टि हो चुकी है, लेकिन मरीजों को सभी दवाएं नहीं मिल पा रही हैं। इसके साथ ही ओपीडी में मुफ्त दवाएं मिलने की व्यवस्था है। आरोप है कि मरीजों को इन दोनों ही स्टोर पर उपलब्ध दवाओं के बजाय अन्य ब्रांड की दवाएं लिखी जाती हैं। इस वजह से मरीजों को महंगी दवाएं कैंपस के बाहर से खरीदनी पड़ती हैं।