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केजीएमयू अब गायनी में एमडी की जगह देगा एमएस की डिग्री, शुरू होंगे कई सर्टिफिकेट कोर्स

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लखनऊ। केजीएमयू के स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग में अब एमडी के बजाय एमएस की डिग्री दी जाएगी। विश्वविद्यालय के मेडिसिन संकाय की फैकल्टी बोर्ड बैठक में इसका प्रस्ताव पास हुआ है। इसके साथ ही कई विभागों में पोस्ट डॉक्टोरल सर्टिफिकेट कोर्स शुरू करने के प्रस्ताव पर मुहर लगी। वहीं, विभिन्न विभागों की बोर्ड ऑफ स्टडीज में पास किए गए पाठ्यक्रम सुधार के प्रस्तावों को भी फैकल्टी बोर्ड ने हरी झंडी दिखाई।
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केजीएमयू के स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग में पोस्ट ग्रैजुएशन पूरा करने वाले स्टूडेंट्स को फिलहाल एमडी की डिग्री अवॉर्ड की जाती है। जबकि विभाग में काफी बार ऐसी स्थिति आती है, जब प्रसूता की सर्जरी करनी पड़ती है। इसे देखते हुए विभाग में एमडी की डिग्री को एमएस से प्रतिस्थापित करने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। फैकल्टी बोर्ड से पास होने के बाद इसे एकेडमिक काउंसिल तथा आखिर में कार्य परिषद से मंजूरी के लिए रखा जाएगा। ऐसा होने पर पीजी डिग्री का नाम बदल जाएगा। इसके साथ ही विभाग में ऑब्सटेट्रिक क्रिटिकल केयर में पोस्ट डॉक्टोरल सर्टिफिकेट कोर्स शुरू करने का प्रस्ताव पास किया गया। इसी तरह पीजी कोर्स में मेडिकल एजूकेशन, मेडिको लीगल और रिसर्च मेथडोलॉजी को शामिल करने का प्रस्ताव भी पास हुआ।
कई विभागों में नए कोर्स शुरू करने का प्रस्ताव
फैकल्टी बोर्ड के सामने पीडियाट्रिक आर्थोपेडिक्स विभाग में पीडियाट्रिक प्लास्टर टेकभनीशियन का नया सर्टिफिकेट कोर्स शुरू करने, एमसीएच पाठ्यक्रम शुरू करने तथा पीडियाट्रिक आर्थोपेडिक्स विभाग में फेलोशिप की सीट बढ़ाने का प्रस्ताव भी रखा गया। पैथोलॉजी विभाग में अंकोसर्जिकल पैथोलॉजी, नेफ्रोयूरोपैथोलॉजी, एंडवांस्ड एंड क्लीनिकल पैथोलॉजी और लैबोरेट्री मेडिसिन में पोस्ट डॉक्टोरल सर्टिफिकेट कोर्स शुरू करने का प्रस्ताव रखा गया। क्रिटिकल केयर मेडिसिन विभाग में इंडियन डिप्लोमा इन क्रिटिकल केयर मेडिसिन विभाग की सीट दो से बढ़ाकर चार करने और पोस्ट डॉक्टोरल सर्टिफिकेट कोर्स शुरू करने का प्रस्ताव भी रखा गया। इसके साथ ही इस विभाग में इंडियन फेलोशिप क्रिटिकल केयर मेडिसिन को पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाने का प्रस्ताव भी बोर्ड से मंजूरी के लिए रखा गया। वहीं, फॉर्माकोलॉजी, एनीस्थीसियोलॉली और रेस्पेरेटरी मेडिसिन विभाग में नए कोर्स और सीट बढ़ाने से संबंधित प्रस्ताव बोर्ड के सामने रखे गए। इनमें से ज्यादातर प्रस्तावों को बोर्ड ने अपनी मंजूरी दे दी। वहीं, कुछ पाठ्यक्रमों से संबंधित इंफ्रास्ट्रक्चर आदि न होने ने फिलहाल उन पर रोक लगा दी गई है।
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35 साल बाद एमबीबीएस पूरा करने का प्रस्ताव खारिज
फैकल्टी बोर्ड के सामने एक दिलचस्प मामले के रूप में करीब 35 साल बाद एमबीबीएस डिग्री पूरी करने के लिए दोबारा दाखिले संबंधी प्रस्ताव भी रखा गया। कुलवंत सिंह नाम के स्टूडेंट ने वर्ष 1986 में दाखिला लिया था। इसके बाद उसने प्रथम वर्ष की परीक्षा पास करने के बाद पढ़ाई छोड़ दी थी। अब वह दोबारा अपनी डिग्री पूरा करना चाहता था। बोर्ड ने इस प्रस्ताव को फिलहाल खारिज कर दिया है। इस संबंध में नई गाइडलाइन तैयार होने के बाद ही प्रस्ताव पर विचार करने की बात कही गई।
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