केजीएमयू में जमकर हुआ था बवाल।
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किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय में प्रस्तावित हड़ताल फिलहाल नहीं होगी। शासन ने केजीएमयू प्रशासन से नौ जनवरी को हुई घटना के और सबूत मांगे हैं। नौ जनवरी को कुलपति कार्यालय पर हुए हंगामे और तोड़फोड़ के बाद केजीएमयू के पांचों संगठन ने एफआईआर न होने पर हड़ताल की चेतावनी दी थी। शासन और केजीएमयू प्रशासन से हुई वार्ता के बाद फिलहाल सभी कार्य बहिष्कार न करने के लिए तैयार हो गए हैं।
केजीएमयू में धर्मांतरण के प्रयास का मुद्दा फिलहाल गर्माया हुआ है। इसी मामले में नौ जनवरी को राज्य महिला आयोग की आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव के केजीएमयू पहुंचने के बाद जमकर हंगामा हुआ था। अपर्णा यादव के समर्थकों और हिंदू संगठन के कार्यकर्ताओं ने कुलपति कार्यालय पर हंगामा किया था। इस दौरान तोड़फोड़ भी हुई थी। केजीएमयू शिक्षक संघ, कर्मचारी संघ, नर्सिंग एसोसिएशन, रेजिडेंट एसोसिएशन और एससी-एसटी कार्मिक संगठन ने इस पर आक्रोश जताते हुए मंगलवार को हड़ताल की घोषणा की थी। कुलपति के अनुरोध पर प्रस्तावित कार्य बहिष्कार एक दिन के लिए टाला गया था। इस बीच मंगलवार को शासन ने घटना के संबंध में केजीएमयू प्रशासन से और सबूत मांगे। ऐसे में कुलपति की अपील पर सभी संगठन फिलहाल कार्य बहिष्कार टालने के लिए तैयार हो गए।
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उपाध्यक्ष और केजीएमयू प्रशासन के बीच फंसा मामला
सूत्रों का कहना है कि महिला आयोग की उपाध्यक्ष ने नौ जनवरी को हुई मुलाकात में मुख्यमंत्री को केजीएमयू अकेले जाने की बात बताई है। वहीं केजीएमयू प्रशासन की ओर से पुलिस को दी गई तहरीर में अपर्णा यादव के साथ आए समर्थकों की ओर से हंगामा और प्रदर्शन करने की बात कही गई है। इसी को देखते हुए शासन ने अतिरिक्त सबूत मांगे हैं। केजीएमयू प्रशासन की ओर से घटना से संबंधित सीसीटीवी फुटेज और वीडियो रिकॉर्डिंग शासन को भेजे गए हैं।
कुलपति से हुई है सीएम की बात
केजीएमयू शिक्षक संघ के अध्यक्ष प्रो. केके सिंह का कहना है कि केजीएमयू के सभी डॉक्टर और कर्मचारी अपनी सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं। नौ जनवरी को हुई घटना के संबंध में कुलपति की मुख्यमंत्री और प्रमुख सचिव गृह से वार्ता हुई है। दोनों ने मामले को बेहद गंभीर बताते हुए कार्यवाही का आश्वासन दिया है। इसलिए माननीयों के आश्वासन और मरीज हित में कार्य बहिष्कार टाल दिया गया है।