लखनऊ। वो खूबसूरत वादियां, कश्मीर की दिलकश घाटियां, बड़े-बड़े बागान और झेलम किनारे अपना आशियाना। ये सब कुछ छोड़कर आना पड़ा। भूखे-प्यासे दर-दर की ठोकरें खाते हुए उन कश्मीरियों का दर्द दशकों से उनके जेहन में कैद था। महज तस्वीरों में ही वे अपना आशियाना देखकर रो लेते थे। ...और जब कोई उनसे कश्मीर के बारे में बात कर देता तो यह दर्द आंखों से फूट पड़ता था। केंद्र सरकार ने जैसे ही लोकसभा में कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने के लिए प्रस्ताव पेश किया तो उनकी आंखों में चमक के साथ अपने आशियाने की यादें जवां हो गईं। लखनऊ में आकर बसे कश्मीरी पंडितों ने सरकार के इस फैसले पर अपनी खुशी का इजहार किया।
केंद्र सरकार की ओर से कश्मीर में अनुच्छेद 370 हटाए जाने और जम्मू-कश्मीर को केंद्र शासित राज्य बनाने की घोषणा के बाद राजधानी के कश्मीरी परिवारों में जश्न का माहौल है। इस दौरान भावुक हो गए कश्मीरी बृजेन्द्र काचरू और रवीन्द्र कोतरू ने अमर उजाला से अपने मन की बात साझा की। उन्होंने कहा कि जैसा आपका कमरा 18-20 के पैमाने पर एसी कमरे में चिल्ड कूल रहता है, ऐसे ही सदाबहार मौसम वाला हमारा कश्मीर था। बड़े-बड़े बंगले, बड़े बागान और सुबह-शाम झेलम की मौज। लेकिन रातों-रात हम वहां से निकाल दिए गए। पैदल, बिना खाने के इंतजाम के और आकर यहां 40-45 डिग्री वाली गर्मी के प्रदेशों में बस गए। घर से निष्कासन का दंश और ऊपर से ऐसा मौसम जो हम पहली बार झेल रहे थे। दिन और रातें तो बस रोते और पसीना पोंछते बीतती थीं। न हमने पहले ऐसे दिन देखे थे और न ही ऐेसे मौसम। लेकिन आज 29 साल बाद सरकार ने ऐसी खुशखबरी दी है कि आज आंसू फिर से बह चले हैं। लेकिन इस बार ये आंसू खुशी के हैं। न हम बोल पा रहे हैं, न कह पा रहे हैं। अनुच्छेद 370 हटने से हमारी घर वापसी का सपना पूरा होगा।
कश्मीरी पंडितों को हैं सरकार से उम्मीदें
निर्वासित कश्मीरी पंडितों के हक के लिए कई सालों से काम कर रही संस्था पनुन कश्मीर के बैनर तले नगर के तमाम कश्मीरी पंडितों ने जश्न मनाया। संस्था के लखनऊ यूनिट के सचिव रवि काचरू ने बताया कि अनुच्छेद 370 हटा दिया गया है। ऐसे में अब हमारी जो संपत्तियां वहां लगभग 29-30 सालों से पड़ी हैं, जिन्हें हम कभी कभार किसी दोस्त की मदद से तस्वीरों, सोशल मीडिया पर देख लिया करते थे, उम्मीद है अब वहां बस भी सकेेंगे। हम तो काफी उम्र गुजार चुके, चाहते हैं कि हमारे बच्चे और अगली पीढ़ी अपना घर-अपनी जायदाद में कम से कम वहां रहकर तो बिता सकेंगे।
राजधानी में रह रहे 250 कश्मीरी परिवार
शहर में 250 कश्मीरी परिवारों के तकरीबन 700 सदस्य रहते हैं। रवीन्द्र कोतरू ने बताया कि हमारी बेशकीमती जमीनें पॉश इलाके में पड़ी हुई हैं, अब उम्मीद है कि उसका कोई निपटारा हो सकेगा। हमारे बच्चों ने कश्मीर सिर्फ एक वेकेशन प्लेस के तौर पर जाना है, जो कि हमारा घर रहा है। अब उम्मीद है जैसे-जैसे हमारी संपत्तियां हमको मिलती जाएंगी, वो वहां रह भी सकेंगे। दोपहर बाद से ही सभी मित्र, रिश्तेदार सोशल मीडिया पर चल रहे तमाम जोक्स और चुटकुले भी शेअर कर वहां झेलम के किनारे लोकेशन पर होटल खुलवाने को लेकर मजाक करते रहे। दिन भर समाज के दीपक काचरू, राजीव मिर्जा, नमिता कौल, सरला काचरू, संगीता बकाया, मीनाक्षी तनखा, अंजली लांगू, अजय टिक्कू समेत तमाम जुटे।
निर्वासित कश्मीरी पंडितों के हक के लिए कई सालों से काम कर रही संस्था पनुन कश्मीर के बैनर तले नगर के तमाम कश्मीरी पंडितों ने जश्न मनाया। महानगर के काचरू हाउस में संस्था के तमाम सदस्यों और पदाधिकारियों ने एक-दूसरे का मुंह मीठा कराया। इसके बाद सभी ने दोपहर से शाम तक चाय-नाश्ते, समोसे, पकौड़े की पार्टी का आनंद उठाया। संस्था के लखनऊ यूनिट के सचिव रवि काचरू ने बताया कि अनुच्छेद 370 हटा दिया गया है। ऐसे में अब हमारी जो संपत्तियां वहां लगभग 29-30 सालों से पड़ी हैं, जिन्हें हम कभी कभार किसी दोस्त की मदद से तस्वीरों, सोशल मीडिया पर देख लिया करते थे, उम्मीद है अब वहां बस भी सकेेंगे।
इतनी आसान बनेगी राह इसकी उम्मीद नहीं थी
कश्मीर में चल रहे प्रयासों के चलते तीन दिनों से क्या हो सकता है इसको लेकर हम लोग कयास लगा रहे थे, लेकिन केंद्र शासित प्रदेश बन जायेगा, हमारे लिये दोबारा बसने की राह इतनी आसान होगी इसकी यूं उम्मीद नहीं थी। एकदम सरप्राइज, अब बस सरकार हम कश्मीरी पंडितों के विस्थापन को गंभीरता से ले। राजनीतिक दलों की साजिश केचलते हमारा जन्नत जैसा घर हमसे छूट गया, आज ऐसा लग रहा है कि वो हमें दोबारा मिलेगा।
रवि काचरू
मेरा तो मन कर रहा है अभी उउ़कर अपने घर गंव पहुंच जाऊं
घर से निकाले जा चुके लोगों को वापस उनका घर मिलने की आस भले ही इतने लंबे समय के संघर्ष केबाद मिली हो, लेकिन खुशी है कि अपन ही जिंदगी में वो मौका भी आ गया, जब हमें मौका मिलेगा कि वहां से भगाये गये हम लोगों को वापस बसने का मौका मिले। ये सब इतनी आसानी से हो जायेगा इसका भरोसा नहंी हो रहा है। सुबह से काम ध्ंाधे में लगने का मन ही नहीं कर रहा है। जब से कश्मीर के केंद्र शासित राज्य बनने की सूचना सुनी है तभी से मन कर रहा है कि उड़कर अपने उस कश्मीर में पहुंच जाऊं, जहां से हम जैसे हजारों परिवारों को रातों रात जबरिया खदेड ़दिया गया था। पहले की सरकारें दृढ़ इच्छाशक्ति दिखाती तो इसकी नौबत ही नहीं आती।
विजय वांटू
आने वाले समय में अब हमारा घर लौटना धीरेधीरे होगा आसान
सरकार से उम्मीदें तो थीं कि एक दिन वो अनुच्छेद 370 हटायेगी, लेकिन ये सब अचानक से इतनी तेजी से होगा, इसकी कतई उम्मीद नहीं थी। आज इतना बड़ा तोहफा हम सबको मोदी सरकार ने दिया है जिसकी खुशी का कोई ठिकाना नहीं है। सुबह से आंसू रुक नहीं रहे हैं, जब अपनी जमीन घर छोड़ा था वो दुख पलायन के आंसू थे आज खुशी के आंसू हैं। अब आने वाले वर्षाें में हमारा घर लौटना धीरे-धीरे आसान हो जायेगा।
बृजेन्द्र काचरू
जिन्हें भगाया गया, उन्हें वाजिब हक जल्दी मिल जाये तो और अच्छा
अभी तो घोषणा हो चुकी है, लेकिन जब तक अमल न हो जाये तब तक हमें चैन नहीं मिलने वाला। असली में देखा जाये तो कश्मीर की तरक्की और देश के साथ चलने का रास्ता अब खुला है। उसपर आने वाले दिनों में वहां केलोगों को ही अपना शहर राज्य आगे लेकर जाना है। मेरा मानना है कि जो परिवार वहां से भगाये गये, जिनकी संपत्तियां लोकल जनप्रतिनिधियों ने कब्जा लीं, उन्हें हटाकर वाजिब हक वालों को हक दिलवाना भी एक मजबूत चुनौती है।
राजीव मिर्जा
कम से कम लोकल प्रशासन हमारी सुनेगा
जिसको लेकर पूरे देश में चर्चा हुआ करती थी, वो अनुच्छेद 370 हटा दी गई। कश्मीर हमें दोबारा बुला रहा है। अब कम से कम हमारी सुनवाई तो लोकल पुलिस प्रशासन करेगा, जो केंद्र सरकार के अधीन रहेगा। पहले तो हमारी सुनवाई भी इलाकाई पुलिस नहीं करती थी। वो भी इलाकाई लोगों की ही सुनते थे। अब सरकार को विशेष प्रयास जल्द से जल्द करने होंगे कि हमारी वहां जो संपत्तियां हैं उन्हेंकब्जा मुक्त करवा कर हमें सौंपने केलिये भी ठोस नीति बनाये, जिससे परिवारों का विस्थापन आसान हो।
दीपक काचरू