कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा का मान उदयातिथि के कारण सोमवार को है, इसी दिन देव दीपावली का पर्व मनाया जाएगा। मान्यता है कि इसी दिन भगवान विष्णु का प्रथम मत्स्यावतार हुआ था। इस दिन व्रत, पूजन और दान करने का विधान है। साथ ही गंगा स्नान व तीर्थ स्थान पर स्नान-दान का महत्व है। शाम को शहर में दीपदान होगा।
ज्योतिषाचार्य धीरेन्द्र पांडेय और एसएस नागपाल के मुताबिक, पूर्णिमा का प्रारंभ रविवार को दोपहर तीन बजकर 52 मिनट पर हो गया। समापन सोमवार को दोपहर 2 बजकर 45 मिनट पर होगा। इस बार पूर्णिमा तिथि पर कृतिका नक्षत्र और शिव योग का संयोग है। इस दिन चंद्रमा अपनी उच्च राशि वृषभ में होंगे। दिन में स्नान-दान और शाम को दीपदान का विधान है। कहा जाता है कि देवता धरती पर आते हैं, उनके स्वागत में दीपक जलाए जाते हैं।
कहीं रंगोली बनी तो कहीं दीपदान
मनकामेश्वर घाट पर सुबह से ही रौनक थी। मंदिर की ओर से रंगोली व प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। रामाधीन, सीएमएस व आसपास के स्कूलों के बच्चे, सिप्स की छात्राएं मौजूद रहीं। वहीं गोमती आरती के 6865 दिन पूरे होने पर रोटी कपड़ा फाउंडेशन व शुभ संस्कार समिति ने कुड़ियाघाट पर दीपदान किया। 2500 दीपक जलाए गए। कला महाविद्यालय के बच्चों ने सुंदर रंगोली सजाई। समिति की ओर से गोमती में गिर रहे नालों को रोकने की मांग की। इस मौके पर आशीष अग्रवाल, डॉ. विवेक तांगड़ी, पंकज सिंह भदौरिया, अतुल गुप्ता, राजेश आनंद आदि मौजूद रहे।
गोमा की आरती उतारी
गोमती तट पर लोक भारती संस्था ने गोमा की आरती उतारी। लोक भारती के अध्यक्ष विजय बहादुर सिंह के नेतृत्व में शिखा सिंह ,अनिल सिंह विष्णु, अर्चना तिवारी, समाज सेविका डॉ. अंजू वार्ष्णेय, जल दूत नंदकिशोर वर्मा और वन विभाग से शिवांगी आदि दीप जलाए।
यहां पर आज मुख्य आयोजन
- मनकामेश्वर घाट पर शाम 6 बजे 2.51 लाख दीप जलाए जाएंगे। महंत देव्यागिरी के मुताबिक, विभिन्न संगठनों के सहयोग से यह किया जा रहा है।
- प्रातः छह बजे गोमती की महाआरती का आयोजन, कुड़ियाघाट पर होगा। इसके अलावा घरों-मंदिरों में भी दीप जगमगाते हैं।