कारगिल युद्ध में एक ओर जहां परमवीर चक्र विजेता कैप्टन मनोज पांडेय की शौर्य गाथाएं हैं, वहीं दूसरी ओर दो ऐसे भाइयों की जांबाजी के किस्से भी हैं, जिन्होंने अमिट छाप छोड़ी। शनिवार को कारगिल विजय दिवस की 26वीं वर्षगांठ है। ऐसे में जांबाजी की छाप छोड़ने वाले भाइयों की चर्चा जरूरी है।
वर्ष 1999 में इन दोनों भाइयों ने एक साथ कारगिल युद्ध में मोर्चा संभाला। एक भाई ने जहां सेना की एविएशन कोर के हेलीकाप्टर के पायलट के तौर पर जरूरी रसद वगैरह पहुंचाया। वहीं दूसरे ने वायुसेना के जहाजों से पैरा कमांडो को युद्ध क्षेत्र तक पहुंचाया। बात हो रही है लखनऊ के रहने वाले कर्नल जीपीएस कौशिक व उनके भाई स्क्वाड्रन लीडर एसपीएस कौशिक की।
कर्नल कौशिक ने सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया
उन्होंने ने कारगिल युद्ध में अपने पराक्रम का परिचय दिया। कर्नल कौशिक ने अपने हेलीकाप्टर से युद्ध में कुल 3500 ऑपरेशन किए। तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी, रक्षामंत्री जार्ज फर्नांडीज खुद रणभूमि में पहुंचे थे। कर्नल कौशिक ने उन्हें सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया।
बारुदी सुरंग पर पैर पड़ने से वह घायल हो गए
इसी क्रम में उत्तर प्रदेश सैनिक स्कूल के छात्र रहे कर्नल जेके चौरसिया ने भी कारगिल युद्घ में अहम भूमिका निभाई। वह मराठा रेजीमेंट की रॉयल बटालियन की अल्फा टुकड़ी के डटे हुए थे। पाकिस्तानी सेना के हथियारों के भंडार तबाह करने के बाद उन्होंने एक बंकर भी उड़ाया। लेकिन वापसी के दौरान एक बारुदी सुरंग पर पैर पड़ने से वह घायल हो गए।
वहीं कारगिल गर्ल फ्लाइंग अफसर गुंजन सक्सेना पहली महिला फाइटर पायलट थीं, जिन्हें कारगिल युद्ध में कमान संभाली। 20 दिनों तक गोलीबारी के बीच चीता हेलीकाप्टर से युद्धक्षेत्र से घायलों को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाया।