लखनऊ। बच्चों को संस्कार मां के गर्भ से मिलते हैं, लेकिन विवेक स्कूल और समाज से मिलता है। स्कूली ज्ञान के साथ बच्चों को पारिवारिक संबंध की भी शिक्षा देनी चाहिए, ताकि बुजुर्ग खुद को अकेला न महसूस करें। मृत्यु के बाद कंधा देने के लिए बच्चे मौके पर हों। गोमतीनगर स्थित संगीत नाटक अकादमी में शुक्रवार को कंधे नाटक के मंचन में कलाकारों ने प्रस्तुति के जरिये यह संदेश दिया।
नाटक में दिखाया गया है कि बुजुर्ग महिला लकवाग्रस्त होने से बेड पर लेटी है। शादी के 50 साल पूरे होने पर दोनों बुजुर्ग घर में दावत रखते हैं, जिसकी तैयारी बुजुर्ग करता है। पार्टी के बाद सभी लोग घर चले जाते हैं। अगले दिन दोनों की मौत हो जाती है। बच्चे विदेश में रहते हैं इसलिए माता-पिता को कंधा देने में असमर्थ रहते हैं। पड़ोसी कंधा देकर महिला व पुरुष को अंतिम विदाई देते हैं। (संवाद)