कमलेश तिवारी की हत्या करने आए बदमाश जिस मिठाई के डिब्बे में पिस्टल-चाकू छिपाकर लाए थे, वह गुजरात के सूरत का है। यह डिब्बा सूरत के उद्योग नगर उधना स्थित धरती फूड्स प्राइवेट लिमिटेड का था।
डीजीपी ने बताया कि मौके से एक रसीद मिली, जो बुधवार रात करीब साढ़े नौ बजे पिस्ता घड़ी मिठाई खरीदने की है। उक्त मिठाई की कीमत 680 रुपये प्रति किलो थी लेकिन बिल सिर्फ 500 रुपये का है।
बिल का भुगतान नकद रुपये में किया गया था। सूरत से दो दिन पहले खरीदी गई मिठाई के डिब्बे में पिस्टल-कारतूस छिपाकर लाने से हत्या का कनेक्शन आईएसआईएस से जोड़ा जा रहा था। लेकिन आज डीजीपी ने पुख्ता कर दिया कि इस केस का आईएसआईएस से कोई ताल्लुक नहीं है। मिठाई का डिब्बा भी गुजरात के सूरत का ही है।
कमलेश तिवारी हत्याकांड
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बदमाशों ने कमलेश से मिलने के लिए फोन करके समय मांगा था। कमलेश तिवारी के कर्मचारी सौराष्ट्रजीत सिंह ने बताया कि बृहस्पतिवार रात करीब 12.30 किसी का फोन आया था। उसने मिलने के लिए कहा लेकिन कमलेश तिवारी ने काफी रात होने की बात कहते हुए मना कर दिया।
सुबह उक्त व्यक्ति ने फिर से फोन करके मिलने के लिए समय मांगा तो कमलेश ने उन्हें ऑफिस आने को कहा। पुलिस को कमलेश के मोबाइल फोन से संदिग्धों के मोबाइल नंबर मिल गए हैं।
गोडसे का मंदिर बनाने का किया था एलान
मूल रूप से सीतापुर जिले के संदना थाना क्षेत्र के पारा गांव निवासी कमलेश तिवारी ने अपने गांव में नाथूराम गोडसे का मंदिर बनवाने का एलान भी किया था। वर्ष 2014 में उन्होंने एलान करते हुए कहा था कि जनवरी 2015 में वह मंदिर की नींव गांव में रखेंगे।
उस समय पुलिस ने गांव में डेरा डाल दिया था। हालांकि बाद में कमलेश गांव नहीं पहुंचे थे। पारा गांव वासियों के अनुसार कई वर्ष पूर्व कमलेश अपने परिवार के साथ महमूदाबाद चले गए थे। उनके पिता देवी प्रसाद उर्फ रामशरण महमूदाबाद कस्बे के रामजानकी मंदिर में पुजारी थे।