केंद्र की मोदी सरकार का एक हजार और पांच सौ के नोटों की बंदी का फैसला पूरी तरह राष्ट्र हित में है। इससे भ्रष्टाचार पर अंकुश लगेगा। कालाधन समाप्त होगा। मध्य और गरीब तबके का भला होगा। इस मामले में अगर कुछ कमी थी तो वह तैयारी।
पूरी व्यवस्था सहेजने के बाद ही नोटबंदी का कदम उठाना चाहिए था। आज परेशानी झेलने के बावजूद जनता देशहित में कष्ट सहते हुए रुपया पाने के लिए लाइन में खड़ी हो रही है।
बुधवार को यह बातें शिया धर्मगुरु मौलाना कल्बे जव्वाद ने राठहवेली के इमामबाड़ा जवाहर अली में कहीं। वह कर्बला के 72 शहीदों के शबीहे ताबूतों के जियारत कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे थे। सवालों के जवाबों में उन्होंने कहा कि सपा परिवार में जो कुछ हुआ, वह ड्रामा था या झगड़ा?
यह वाकई में आपसी झगड़ा था या फिर अखिलेश यादव को जनता के बीच और बेहतर तरीके से इंट्रोड्यूज करने का तरीका? मामला चाहे जो कुछ भी रहा हो इससे सपा को नुकसान हुआ है और आम जनता का इस पार्टी पर विश्वास डिगा है।