फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

पुलिसकर्मियों से मारपीट करने वाले वकीलों की जमानत याचिका निरस्त

Sat, 03 Nov 2018 09:41 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
विज्ञापन
जज के केबिन में दरोगा को पीटते वकील। - फोटो : amar ujala
विज्ञापन

पुलिस-अधिवक्ता की रार फिलहाल थमती नजर नहीं आ रही है। इलाहाबाद हाईकोर्ट की ओर से कोर्ट परिसर में धरने पर रोक के आदेश के बाद भी शनिवार को वकीलों ने सांकेतिक धरना दिया।

विज्ञापन


यूपी बार कौंसिल के पूर्व चेयरमैन व उत्तर प्रदेश अधिवक्ता महासंघ के अध्यक्ष अजय शुक्ल और बार कौसिंल ऑफ उत्तर प्रदेश के पूर्व अध्यक्ष अखिलेश चन्द्र अवस्थी के सीतापुर पहुंचने पर वकीलों ने सभा कर प्रकरण पर आगामी रणनीति बनाई।

इसके बाद पत्रकार वार्ता कर वकील समुदाय ने पुलिसिया कार्रवाई की निंदा करते हुए सड़क से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक संघर्ष करने के अलावा 15 नवंबर को सीतापुर में महापंचायत का एलान किया है। उधर, जेल भेजे गए दो आरोपी वकीलों की जमानत अपर सत्र न्यायाधीश धर्मेन्द्र पांडेय द्वारा निरस्त कर दी गई।
विज्ञापन


उच्च न्यायालय में दिवाली का अवकाश होने से अब इन आरोपी वकीलों की जमानत पर सुनवाई दीपावली के बाद ही संभव होगी। सीतापुर क्लब से अवैध कब्जा हटाने के दौरान वकीलों और पुलिस में जिला जज के चैंबर में झड़प हो गई थी। पुलिस ने इस मामले में दो नामजद वकीलों चन्द्रभाल गुप्ता व दीपक राठौर को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। इसके बाद से शहर का माहौल लगातार गरमाता जा रहा है।

इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा कोर्ट परिसर में वकीलों के धरने पर रोक के आदेश के बावजूद शनिवार को सांकेतिक धरना दिया गया। यूपी बार कौंसिल के पूर्व चेयरमैन व उत्तर प्रदेश अधिवक्ता महासंघ के अध्यक्ष अजय शुक्ल और बार कौसिंल ऑफ उत्तर प्रदेश के पूर्व अध्यक्ष अखिलेश चन्द्र अवस्थी के सीतापुर पहुंचने पर वकीलों ने सभा कर अगली रणनीति तय की। 

विज्ञापन

पत्रकार वार्ता में यूपी बार कौंसिल के पूर्व चेयरमैन ने कहा कि पुलिस अधीक्षक व उनके अधीनस्थ कर्मियों द्वारा अधिवक्ताओं के साथ दुर्व्यवहार किया गया। उनके विरुद्ध झूठे मुकदमे किए गए।

हिरासत में लेकर बुरी तरह पीटा गया और नियमो को ताक पर रखकर जिला प्रशासन द्वारा अधिवक्ताओं के परिजनों से एवं उनके अधिवक्ताओं से आज तक मिलने नहीं दिया जा रहा है, जो कि घोर निन्दनीय है।

वहीं पूर्व अध्यक्ष बार कौसिंल ऑफ उत्तर प्रदेश अखिलेश चंद्र अवस्थी ने कहा कि सीतापुर एसपी के कृत्य से उसकी छोटी मानसिकता उजागर होती है। सीतापुर में आए दिन अपराध का ग्राफ बढ़ता जा रहा है, पर इस पर अंकुश लगाने में एसपी नाकाम हैं। अपनी गल्ती छिपाने के लिए इस प्रकार का कृत्य कर एसपी ने अपनी छोटी मानसिकता को जगजाहिर किया है।

उन्होंने कहा कि पूरे प्रदेश का अधिवक्ता समाज सीतापुर के अधिवक्ताओं के साथ है। सड़क से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक संघर्ष किया जाएगा। जिलाधिकारी व पुलिस अधीक्षक सीतापुर के स्थानान्तरण के बाद भी उन्हें अपने इस कृत्य का फल भुगतना पड़ेगा। 

वकील समुदाय ने ऐलान किया कि 15 नवंबर को सीतापुर में वकीलों की महापंचायत होगी। इसमें प्रदेश भर के वकीलों से शामिल होने की अपील की गई है। उधर, इस मामले में जेल भेजे गए अधिवक्ता चन्द्रभाल गुप्त व दीपक राठौर की जमानत अर्जी शनिवार को अपर सत्र न्यायाधीश धर्मेन्द्र पांडेय ने उचित आधार न पाए जाने पर खारिज कर दी। अब जमानत अर्जी उच्च न्यायालय में प्रस्तुत की जाएगी। दिवाली का अवकाश होने से जेल में निरुद्ध दोनों वकीलों की जमानत अब दीपावली के बाद ही संभव हो सकेगी। 
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें