उन्होंने लगातार पांच महीने तक न सिर्फ चुनाव प्रबंधन पर नजर रखी, बल्कि क्षेत्रों व जिलों का दौरा भी किया। बूथ कार्यकर्ताओं से सीधे संपर्क और संवाद की शैली से जमीनी सच्चाई समझकर रणनीति बनाई।
नड्डा ने चुनावी टीम को लगातार सक्रिय रखा और चुनावी गणित की हकीकत जानने के लिए पार्टी से इतर लोगों से भी मिले। यही कारण रहा कि भाजपा सपा-बसपा गठबंधन को बेअसर बना दिया।