कांग्रेस नेता पंडित कमलापति त्रिपाठी की 112वीं जयंती पर रविवार को हिन्दी संस्थान के यशपाल सभागार का मंच दिग्गज पत्रकारों से सजा था। त्रिपाठी के पत्रकार और संपादक के रूप में योगदान का स्मरण करने के लिए आयोजित इस समारोह में जहां वरिष्ठ पत्रकार विनोद दुआ को कमलापति त्रिपाठी राष्ट्रीय पत्रकारिता पुरस्कार से सम्मानित किया गया, वहीं लखनऊ व वाराणसी के कई वरिष्ठ पत्रकारों का भी सम्मान हुआ।
कांग्रेस की वरिष्ठ नेता मोहसिना किदवई, दिल्ली विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति दिनेश सिंह, वरिष्ठ पत्रकार के.विक्रम राव एवं राममोहन पाठक, संकटमोचन मंदिर के महंत विशंभर नाथ मिश्र और कांग्रेस नेता एवं कमलापति के पौत्र राजेशपति त्रिपाठी की उपस्थिति में ये सम्मान दिए गए।
पुरस्कार ग्रहण करते हुए विनोद दुआ ने कहा, मीडिया को न सरकारी बनने की जरूरत है और न दरबारी। उन्होंने शेरो-शायरी के बहाने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की चर्चा की और कहा कि आज प्रतिरोध की ताकत क्षीण हुई है। किदवई ने कहा, इस देश में कहीं हिन्दू हैं, कहीं मुस्लिम, कहीं सिख तो कहीं ईसाई। देश का ताना-बाना सबने मिलकर बनाया है। आज देश को अपना समझने की जरूरत है। हमें कमलापति जी से निष्ठा और निर्भीकता की शिक्षा लेनी चाहिए।
दिल्ली विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति दिनेश सिंह ने कहा, कम ही लोग जानते हैं कि केंद्र में रेल मंत्री रहते दिल्ली की यातायात व्यवस्था को कमलापति त्रिपाठी ने काफी सुधारा था। उन्होंने कई महत्वपूर्ण ट्रेनें शुरू कीं। विक्रम राव ने कहा, कमलापति श्रमजीवी पत्रकार थे जबकि आज वे लोग देश चला रहे हैं जिनका स्वतंत्रता आंदोलन में कोई योगदान नहीं है।
वाराणसी को स्मार्ट सिटी बनाने की बात करने वाले भूल जाते हैं कि ये विद्वानों का नगर है
अमर उजाला के पत्रकार आलोक पराड़कर व रोली खन्ना।
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संकट मोचन मंदिर के महंत विशंभर नाथ मिश्र ने वाराणसी की संस्कृति और समस्याओं की विस्तार से चर्चा की। कहा कि जो वाराणसी को स्मार्ट सिटी बनाने की बात करते हैं वे भूल जाते हैं कि यह नगर पहले से ही विद्वानों का नगर है।
कमलापति त्रिपाठी पूरे बनारस का प्रतिनिधित्व करते थे लेकिन आज बनारस का नेतृत्व स्थानीय नहीं है। पत्रकार राममोहन पाठक ने कहा, कमलापति जी की पत्रकारिता में गौरव था। कार्यक्रम संयोजक राजेशपति त्रिपाठी ने कहा, कांग्रेस की जीत साम्प्रदायिकता की हार में है। इस मौके पर बापू और भारत पुस्तक का लोकार्पण हुआ।
ये वरिष्ठ पत्रकार हुए सम्मानित
राजधानी के जिन पत्रकारों का सम्मान किया गया उनमें अतुल चन्द्रा, नवीन जोशी, दिलीप अवस्थी, राजेन्द्र द्विवेदी, रवीन्द्र सिंह, गोविन्द पंत राजू, सुरेन्द्र दुबे, राकेश पांडेय, किशन सेठ, प्रदीप शाह, सुबीर रॉय, शरत प्रधान, हसीब सिद्दीकी व जोखू तिवारी शामिल हैं। सभी को स्मृति चिह्न, सम्मान पत्र एवं शाल भेंट किया गया। पीके राय बीमार होने के कारण और ताविषी लखनऊ से बाहर होने के कारण पुरस्कार नहीं ले सकीं। फैजाबाद के वरिष्ठ पत्रकार शीतला सिंह को भी सम्मानित किया गया।
वाराणसी से जुड़े इन पत्रकारों का हुआ सम्मान
चूंकि कमलापति त्रिपाठी वाराणसी के थे इसलिए उन पत्रकारों का भी सम्मान किया गया जो मूलत: वाराणसी के हैं। इसके तहत समारोह में अमर उजाला के दो पत्रकारों आलोक पराड़कर एवं रोली खन्ना का सम्मान हुआ। इनके अलावा सम्मानित होने वालों में वाराणसी के पत्रकार निरंकार सिंह एवं गोपेश पांडेय भी शामिल थे।