फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

फ्लैट और प्लॉट घोटालों के बाद अब एलडीए का नया कारनामा

Wed, 19 Apr 2017 03:38 PM IST
amarujala.com, written by अतुल भारद्वाज
विज्ञापन
डेमो
विज्ञापन
कमीशनखोरी, फ्लैट और प्लॉट घोटालों के बाद अब लखनऊ विकास प्राधिकरण का नौकरी घोटाला सामने आया है। 12 बेरोजगारों से सुपरवाइजर और चार से मेट पद के लिए 1.16 करोड़ रुपये में डील हुई। 60 करोड़ रुपये का बयाना लेकर जाली नियुक्ति पत्र भी जारी कर दिए गए।
विज्ञापन


यह नियुक्ति पत्र पूर्व वीसी राजीव अग्रवाल और अधिष्ठान अधिकारी के नाम पर जारी किए गए।  मामला तब खुला जब नौकरी पाने वाले ज्वॉइन करने एलडीए पहुंचने लगे। इस मामले अब तक दो एफआईआर भी पुलिस में दर्ज हो चुकी हैं।

इनमें से एक लखनऊ तो दूसरी शाहजहांपुर में दर्ज कराई गई है। 12 लोगों को नौकरी के नाम पर फर्जी अपाइंटमेंट लेटर थमाने वाले छह लोगों ने खुद को डीएम कार्यालय और एलडीए में कार्यरत बताया था।
विज्ञापन


इस मामले में अविनाश राना, उमेश राना, रेखा राना, नागेंद्र प्रताप सिंह, अशोक सिंह, विनीत कुमार श्रीवास्तव को आरोपी बनाकर कृष्णानगर थाने में केस दर्ज है। जबकि शाहजहांपुर के तिलहर में हुई एफआईआर के मुुताबिक किसी शिवकुमार ने खुद को एलडीए का कर्मचारी बताते हुए यहां नौकरी दिलाने का झांसा दिया।

बैक डेट में जारी क‌िए गए लेटर

डेमो - फोटो : google
जुलाई 2015 की अलग-अलग तारीख में जाली नियुक्त पत्र दिए गए। इसमें दीपक कुमार पुत्र हरीशंकर, संतोष कुमार पुत्र रामलाल, राजकुमार यादव पुत्र गया प्रसाद, समदर्शी पुत्र केशराज सिंह, अभिनंदन गुप्ता पुत्र कृष्णकुमार गुप्ता, संदीप कुमार मिश्रा पुत्र रमापति मिश्रा, रियासत अली पुत्र तरन्नुम, अतुल कुमार पुत्र अगनू प्रसाद, रोहित कुमार पुत्र ओमप्रकाश, राघवेंद्र प्रताप सिंह चौहान पुत्र बृजेश सिंह चौहान, विश्वनाथ तिवारी पुत्र गोकुल प्रसाद तिवारी, वीरेंद्र कुमार मिश्रा पुत्र रामकिशोर मिश्रा को नियुक्ति दी गई।

इनके लिए जाली नियुक्ति पत्र पूर्व वीसी राजीव अग्रवाल ने नाम से उस समय जारी हुए, जब वह वीसी ही नहीं थे। वह 17 अप्रैल 2013 तक ही वीसी रहे। इन 12 लोगों को नौकरी सुपरवाइजर के पद पर दी गई। यह लोग अमेठी, उन्नाव, रायबरेली और लखनऊ के रहने वाले हैं।

वहीं चार लोगों को एलडीए के अधिष्ठान अधिकारी के जाली साइन से लेटर जारी हुए हैं। मेट के पद पर तैनात किए गए इन लोगों के नाम अर्जित सिंह पुत्र शिवमोहन सिंह, नीरज कुमार सिंह पुत्र कृष्णपाल सिंह, विवेक कुमार सिंह पुत्र नत्थू सिंह, रूबी सिंह पुत्री कृ ष्णपाल सिंह हैं। ये सभी शाहजहांपुर के तिलहर थानाक्षेत्र के अजमाबाद के रहने वाले हैं।

शाहजहांपुर के तिलहर में हुई एफआईआर के मुुताबिक किसी शिवकुमार ने खुद को एलडीए का कर्मचारी बताते हुए यहां नौकरी दिलाने का झांसा दिया। अपने मजबूत संबंधों का हवाला देते हुए चारों से 12 लाख रुपये भी वसूल लिए। कुल 16 लाख रुपये देने थे। 11 मार्च 2013 को सभी को यह जाली आदेश भी थमा ‌द‌िया गया।
विज्ञापन

किसकी मिलीभगत से हुआ इतना बड़ा घोटाला

डेमो - फोटो : अमर उजाला
जिस तरह ये दोनों मामले सामने आए हैं और जिस तरह से जाली नियुक्ति पत्र जारी किए गए, वह बिना किसी की मदद के तो हो नहीं सकता। इसमें एलडीए कर्मचारियों की मिलीभगत की आशंका से इन्कार नहीं किया जा सकता। आखिर कौन हैं वे लोग, जिनकी शह पर इतने बड़े घोटाले को अंजाम दे दिया गया।

एलडीए जिस एक्ट से बना है उसमें कोई भी नियु्क्ति वीसी के आदेश पर की जा सकती है। इस नियुक्ति का आदेश वीसी या फिर प्रभारी अधिष्ठान कर सकते हैं। इसमें अधिष्ठान से मानव संसाधन की जरूरत का एक प्रस्ताव बनाया जाता है।

इसके बाद वीसी इस प्रस्ताव पर फैसला लेते हैं। इसी का फायदा जालसाज उठा रहे हैं। वीसी के जाली हस्ताक्षर कर नियुक्ति पत्र बनाए गए। एलडी के एक अधिकारी ने बताया कि जिस तरह से जाली आदेश बनाए गए है। उससे यह तय है कि कोई एलडीए का कर्मचारी इससे जुड़ा है।

‘12 लोगों के नियुक्ति पत्र की जांच कराई गई। पूर्व वीसी के आदेश पर नियुक्ति की कोई फाइल एलडीए में मौजूद नहीं हैं। असल में ऐसी कोई नियुक्ति कभी हुई ही नहीं हैं। इसकी सूचना कृष्णानगर थाने की पुलिस को भेज दी गई है।’ - अरूण कुमार, सचिव, एलडीए

‘चार लोगों के मेट पद के लिए नियुक्ति पत्र जारी किए गए। असल में यह सभी जाली हैं। इनके साथ फ्रॉड हुआ। इसकी एफआईआर भी शाहजहांपुर में कराई गई है। पुलिस मामले की जांच कर रही है। एलडीए से कोई नियुक्ति पत्र जारी नहीं हुआ।’  - धनंजय शुक्ला, प्रभारी अधिष्ठान, एलडीए
 
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें