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जियाउल हक हत्याकांड: प्रधान के घर के पीछे पड़ा मिला था शव, राजा भैया को मंत्री पद से देना पड़ा था इस्तीफा

Thu, 10 Oct 2024 12:37 AM IST
पंकज श्रीवास्‍तव ब्यूरो, अमर उजाला, लखनऊ

सार

सीओ जियाउल हक हत्याकांड में 11 साल बाद 10 दोषियों को उम्रकैद की सजा सुना दी गई है। 2 मार्च 2013 को सीओ जियाउल हक की पिटाई के बाद गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। मामले की राजनीतिक और प्रशासनिक हलके में काफी चर्चा रही थी। 
 
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सीओ जिया उल हक (फाइल फोटो) - फोटो : संवाद
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विस्तार
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प्रतापगढ़ के कुंडा के सीओ जियाउल हक हत्याकांड में सीबीआई की विशेष अदालत ने बुधवार को 11 साल बाद सभी 10 दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। कोर्ट ने सभी पर 19500-19500 रुपये का जुर्माना भी लगाया है। जुर्माने की आधी राशि सीओ की पत्नी परवीन आजाद को दी जाएगी। गौरतलब है कि सीबीआई कोर्ट ने इस मामले में 5 अक्तूबर को 10 आरोपियों को दोषी करार दिया था।

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इससे पहले बुधवार को सभी दोषियों फुलचन्द्र यादव, पवन यादव, मंजीत यादव, घनश्याम सरोज, रामलखन गौतम, छोटे लाल यादव, राम आसरे, मुन्ना पटेल, शिवराम पासी और जगत बहादुर पटेल उर्फ बुल्ले पटेल को कोर्ट में पेश किया गया। जहां सीबीआई के विशेष न्यायाधीश धीरेंद्र कुमार ने सभी को उम्रकैद की सजा सुनाई।

प्रधान की हत्या पर हुआ था बवाल
प्रतापगढ़ के कुंडा के बलीपुर गांव में 2 मार्च 2013 को प्रधान नन्हें यादव की जमीन विवाद में हत्या कर दी गई। प्रधान की हत्या के बाद उनके समर्थकों ने हंगामा शुरू कर दिया और रात सवा आठ बजे बलीपुर गांव के कामता पाल के घर में आग लगा दी। इसी बीच कुंडा थाना प्रभारी सर्वेश मिश्र अपनी टीम के साथ पहुंचे, लेकिन भीड़ की वजह से नन्हें यादव के घर की तरफ जाने की हिम्मत न जुटा सके। वहीं भीड़ को समझा रहे सीओ से झड़प में प्रधान नन्हे यादव के छोटे भाई सुरेश यादव की गोली लगने से मौत हो गई। इसके बाद भीड़ ने सीओ जियाउल हक की पिटाई के बाद गोली मारकर हत्या कर दी थी।
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खेत में मिला था सीओ का शव
रात 11 बजे सीओ की तलाश शुरू हुई तो उनका शव प्रधान के घर के पीछे पड़ा मिला था। इस तिहरे हत्या कांड को लेकर चार एफआईआर दर्ज कराई गई थी। पहली रिपोर्ट थाना प्रभारी मनोज शुक्ला ने प्रधान नन्हे यादव के भाईयों और बेटे समेत 10 लोगों के खिलाफ दर्ज कराई थी। वहीं, प्रधान और सुरेश की हत्या को लेकर भी रिपोर्ट दर्ज हुई थी। सीओ की पत्नी परवीन आजाद ने इस मामले में आखिरी एफआईआर दर्ज कराई थी। पुलिस की विवेचना के दौरान ही शासन ने मामले की विवेचना सीबीआई को सौंप दी थी। सीबीआई ने आठ मार्च 2013 को मामला दर्ज कर विवेचना शुरू की थी।

राजा भैया पर लगा था आरोप
इस हत्याकांड का आरोप तत्कालीन खाद्य एवं रसद मंत्री राजा भैया व उनके करीबी गुलशन यादव समेत कई लोगों पर लगा था। इस मामले की राजनीतिक और प्रशासनिक हलके में काफी चर्चा रही थी। इस घटना के बाद राजा भैया को मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा था। हालांकि बाद में सीबीआई ने राजा भैया और उनके करीबियों को क्लीन चिट दे दी थी। सीबीआई ने राजा भैया की मांग पर नारको टेस्ट भी कराया था।

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