2014 के लोकसभा चुनाव में जयाप्रदा रालोद के टिकट पर बिजनौर से लड़ीं, लेकिन जीत नहीं सकीं। विधानसभा चुनाव 2012 में आजम सपा में वापस आ गए तो 2014 के बाद अमर सिंह की भी सपा में एंट्री हो गई। हालांकि अमर और आजम एक ही पार्टी में होने के बाद भी एक-दूसरे पर शब्दबाण चलाते रहे।
मुलायम सिंह यादव के कुनबे में वर्चस्व की जंग ठनी तो अमर, मुलायम व शिवपाल के साथ खड़े हुए। बाद में समीकरण बिगड़े तो अमर ने अपनी छवि हिंदूवादी नेता की बनानी शुरू कर दी।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यक्रमों में सक्रिय भागीदारी शुरू कर दी। तकनीकी रूप से तो अमर अब भी सपा के राज्यसभा सदस्य हैं, पर वह सार्वजनिक रूप से कई बार अखिलेश यादव को चुनौती दे चुके हैं कि वह उन्हें बर्खास्त कर दें।
साफ है कि रामपुर में इस बार जया उन्हीं आजम खां का मुकाबला करेंगी जिन्होंने कभी उनके लिए वोट मांगे थे। अमर सिंह भले ही चुनाव नहीं लड़ रहे हैं लेकिन रामपुर के मैदान में आजम से असली मोर्चा उनका ही होगा।