जयंत ने कहा कि अखिलेश के साथ काफी अच्छे और दोस्ताना माहौल में बातचीत हुई। देश की दिशा और दशा एवं राजनीतिक परिस्थितियों पर पर बातचीत हुई। भाजपा की नीतियों से हो रहे नुकसान पर भी चर्चा हुई। रालोद नेता ने कहा कि सवर्ण आरक्षण भाजपा का चुनावी जुमला है। भाजपा हमेशा इस तरह की चाल चलती है। घोषणाएं करके उन्हें बीच में छोड़ देती है।
संवैधानिक संस्थाओं पर भी सवाल उठाती है। सीबीआई, न्यायपालिका और मीडिया के लिए जैसे लोकतंत्र की आवश्यकता जरूरी थी। भाजपा ने वैसा नहीं किया। भाजपा सरकार सीबीआई का दुरुपयोग कर रही है। भाजपा के खिलाफ लड़ाई में रालोद पूरी तरह समाजवादी पार्टी और अखिलेश यादव के साथ है।
राष्ट्रीय लोकदल की पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अच्छी पकड़ मानी जाती है। पिछले दिनों कैराना में सपा, बसपा और रालोद के अघोषित गठबंधन के प्रयोग ने भाजपा को पटकनी दे दी थी। इस सीट से रालोद के टिकट पर तबस्सुम हसन जीतीं थीं। माना जाता है कि इसी प्रयोग को अब ये दल मिलकर आगे बढ़ा रहे हैं। सूत्रों की मानें तो इस मुलाकात में चौधरी ने पांच-छह सीटें रालोद को देने की मांग की।
इनमें चौधरी अजित सिंह की परंपरागत सीट बागपत, खुद जंयत की सीट मथुरा शामिल हैं। इसके अलावा रालोद की तरफ से कैराना, मुजफ्फरनगर, अमरोहा और बुलंदशहर की गणित का हवाला देते हुए इन पर रालोद के उम्मीदवार लड़ाने का आग्रह किया गया है। हालांकि जयंत ने कहा कि सीटों पर अभी कोई बात नहीं हुई है। पर, यह तय है कि रालोद सपा और बसपा गठबंधन के साथ लड़ेगा और इसे मजबूत करेगा।