जनता एक्सप्रेस हादसे की जांच सोमवार सुबह से शुरू होगी। इसके लिए दक्षिण मध्य परिक्षेत्र के रेल संरक्षा आयुक्त डीके सिंह सोमवार को पुष्पक एक्सप्रेस से लखनऊ पहुंच रहे हैं। यहां से वे सीधे बछरावां घटनास्थल जाएंगे।
उनके साथ रेलवे बोर्ड के सभी विभागाध्यक्षों, जोनल और मंडल मुख्यालय के अफसर भी जाएंगे। इसके बाद लखनऊ लौटकर डीआरएम ऑफिस में जांच शुरू करेंगे। जांच फास्ट ट्रैक की तर्ज पर होगी। संरक्षा आयुक्त एक महीने में जांच पूरी कर इसकी रिपोर्ट सौपेंगे।
इस बीच, मंडल रेलवे के एक अफसर ने ट्रेन के गार्ड और ड्राइवर के बयान अस्पताल में ही दर्ज कर लिये हैं। सूत्रों के मुताबिक ड्राइवर पीएन मिश्र ने 1400 मीटर पहले ब्रेक काम न करने की बात कही है।
जबकि गार्ड के मुताबिक उसने वैक्यूम प्रेशर ब्रेक का इस्तेमाल किया लेकिन वह कारगर नहीं हो सकी। वहीं डीआरएम ऑफिस के कमेटी हॉल में रविवार को 43 कर्मचारियों ने अपने बयान दर्ज किये हैं।
इनमें मुरादाबाद से लखनऊ तक जनता एक्सप्रेस को चलाकर लाने वाला ड्राइवर, सहायक ड्राइवर और गार्ड भी शामिल है। कैरिज व वैगन और लोको कर्मियों से इस हादसे को लेकर सबसे अधिक पूछताछ की गई है।
स्पीडोमीटर की होगी जांच
जनता एक्सप्रेस जब हादसे का शिकार हुई, उस समय उसकी गति क्या थी। उसे कम करने के लिए ड्राइवर ने किसी तरह का प्रयास किया था या नहंी इसके लिए इंजन के स्पीडोमीटर की भी जांच की जाएगी। साथ ही डॉटालॉगर रिपोर्ट से यह पता किया जाएगा कि लखनऊ से बछरावां आउटर तक पहुंचने हर सिग्नल पर उसकी स्पीड कितनी थी।
रविवार को ही डिस्चार्ज हुए ड्राइवर और गार्ड
सोमवार को सीआरएस जांच से ठीक एक दिन पहले रविवार को जनता एक्सप्रेस के ड्राइवर पीएन मिश्र, सहायक लोको पायलट सुबोध और उसके गार्ड को लखनऊ के मंडल रेल अस्पताल के आईसीयू से डिस्चार्ज कर दिया गया।
जबकि नियमानुसार रविवार को रेलवे अस्पताल से किसी भी मरीज को डिस्चार्ज नहीं किया जा सकता है। प्रतापगढ़ लॉबी से इन तीनों का ताल्लुक होने के कारण उनको लखनऊ में रेलवे ने किसी अज्ञात जगह पर भेज दिया है। जहां से उनको सीधे रेल संरक्षा आयुक्त के पास ले जाया जाएगा।
आज फिर बछरावां जाएंगी जनता एक्सप्रेस की बोगियां
जनता एक्सप्रेस की जो बोगियां हादसे का कारण बनी थी, उन्ही बोगियों का रैक सोमवार को यात्रियों को लेकर बछरावां होते हुए वाराणसी तक जाएगा। हालांकि वाराणसी से इस रैक को खाली कराकर जांच के लिए 24 को बछरावां मंगाई जाएंगी। रेल संरक्षा आयुक्त इन बोगियों को पटरी पर दौड़ाकर उसकी गड़बड़ी की जांच भी कर सकते हैं।
कहीं जांच से पहले ही ठीक न कर दें एंगल कॉक की गड़बड़ी
जनता एक्सप्रेस हादसे के पीछे अब तक उसकी बोगियों के एंगल कॉक की गड़बड़ी सामने आ रही है। लेकिन रेलवे ने इन ट्रेनों को दोबारा चला दिया।
सीआरएस को जब इसका पता चला तो उन्होंने हादसे वाली बोगियों को जांच तक न दौड़ाने का आदेश दिया है। इसके बाद जनता एक्सप्रेस को 24 मार्च को वाराणसी से देहरादून और 26 को देहरादून से वाराणसी के बीच निरस्त कर दिया गया।
इस बीच मुरादाबाद रेल मंडल इन बोगियों के एंगल कॉक और वैक्यूम ब्रेक पाइप की गड़बड़ी को दूर कर सकता है जिससे जांच में उसकी गड़बड़ी सामने न आए।
लेकिन संरक्षा कर्मियों तक नहीं पहुंचती एक भी जांच रिपोर्ट
ट्रेन हादसे के बाद होने वाले रेल संरक्षा आयुक्त की जांच रिपोर्ट रेलवे बोर्ड के अफसर अपने संरक्षा से जुड़े जिम्मेदार कर्मचारियों को मुहैया ही नहीं कराता है।
जिससे पिछले हादसों के कारणों का पता लगाकर उन गलतियों को दोबारा न करने की नसीहत मिल सके।एक ट्रेन ड्राइवर के मुताबिक जांच रिपोर्ट आने के बाद रेलवे केवल एक निर्देश जारी कर देता है कि इस नियम का पालन करना है और इसका नहीं।
लेकिन यह नहीं बताया जाता है कि आखिर क्यों यह संशोधन हो रहा है। जांच रिपोर्ट मिलने से पुरानी गलतियों के बारे में पता चल सकता है। जबकि ट्रेन संचालन में सबसे अहम भूमिका परिचालन अनुभाग के ड्राइवर और गार्ड तो निभाते ही हैं, स्टेशन मास्टर और कंट्रोलर भी सबसे अधिक जिम्मेदार होते हैं।