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गोल्डन कार्ड बनाने में जनसुविधा केंद्र लापरवाह, आयुष्मान योजना के मरीजों को लौटा रहे संचालक

Fri, 27 Sep 2019 01:10 PM IST
Amulya Rastogi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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आयुष्मान भारत - फोटो : अमर उजाला
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राजधानी के जनसुविधा केंद्र संचालक आयुष्मान योजना में सहयोग नहीं कर रहे हैं। केंद्रों पर जाने वाले लोगों को लौटा दिया जा रहा है। ऐसे में गोल्डन कार्ड नहीं बन पा रहे हैं। इस संबंध में सीएमओ ने जिलाधिकारी को पत्र लिखा है।
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आयुष्मान योजना के लाभार्थियों को गोल्डन कार्ड बनाने की जिम्मेदारी जनसुविधा केंद्रों को भी सौंपी गई है। इसके एवज में उन्हें 30 रुपया प्रति कार्ड भुगतान भी होता है। इसके बाद भी राजधानी के जनसुविधा केंद्र के संचालक गोल्डन कार्ड बनाने में रुचि नहीं ले रहे हैं। 

विभिन्न जिलों में करीब 80 फीसदी कार्ड जनसुविधा केंद्र से बनाए गए हैं, लेकिन राजधानी में इनकी भागीदारी करीब 20 से 25 फीसदी ही है। लखनऊ में पंजीकृत 279930 परिवारों में 108609 परिवारों को गोल्डन कार्ड जारी किया गया है। अस्पतालों ने 86958 कार्ड जारी किए हैं, जबकि सुविधा केंद्रों से सिर्फ 21651 कार्ड बने हैं। 
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लगाते रहे केंद्रों के चक्कर, नहीं बने कार्ड
रश्मि खंड निवासी पिंकी आशियाना स्थित जनसुविधा केंद्र पर गोल्डन कार्ड बनवाने गईं तो वहां काम अधिक होने की बात कह कर लौटा दिया गया। दूसरे दिन पहुंचीं तो बताया गया कि नेटवर्क फेल है। इस वजह से कार्ड नहीं बन पाएगा। वह बगल में स्थित दूसरे जनसुविधा केंद्र गईं तो वहां भी कार्ड नहीं बनाया गया। 
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आलमबाग निवासी मुस्तकीन मेट्रो स्टेशन के पास स्थित जन सुविधा केंद्र पर गोल्डन कार्ड बनवाने पहुंचे तो कार्ड बनाने से मना कर दिया गया। इसके बाद वह सरकारी अस्पताल में जाकर कार्ड बनवाए। मुस्तकीन का कहना है कि रुपये देने के बाद भी केंद्र कई दिनों तक दौड़ाते रहते हैं।

जिलाधिकारी को भेजा है पत्र
गोल्डन कार्ड बनाने में जनसुविधा केंद्रों का सहयोग नहीं मिल पा रहा है। इस संबंध में जिलाधिकारी को पत्र भेजा गया है। केंद्रों से लौटाने की लगातार शिकायतें मिल रही हैं। उनकी निष्क्रियता से ही गोल्डन कार्ड बनाने का लक्ष्य पूरा नहीं हो पा रहा है। राजधानी के केंद्रों के पास दूसरे तमाम काम हैं। इस वजह से वे इस काम में रुचि नहीं ले रहे हैं। उन्हें रिमाइंडर भेजा जा रहा है। जिलाधिकारी के माध्यम से उन्हें गोल्डन कार्ड बनाने के लिए पाबंद किया जाएगा।
- डॉ. नरेंद्र अग्रवाल, सीएमओ


शिकायत या सुझाव हो तो हमें बताएं
केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत चयनित परिवार के सदस्यों को पांच लाख रुपये तक का इलाज किया जाता है। हालांकि लाभार्थियों को मुफ्त इलाज के लिए अब भी कई मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। इसलिए अमर उजाला ने योजना में आ रही समस्याओं को सामने लाने और उसके निराकरण की दिशा में काम करने के लिए एक अभियान शुरू किया है ताकि लाभार्थियों को ज्यादा से ज्यादा फायदा मिल सके। आपकी कोई शिकायत, सुझाव हो तो हमें बताएं।
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