जल संस्थानों के कर्मचारियों और अधिकारियों को अब वेतन के लाले नहीं पड़ेंगे। राज्य सरकार ऐसी व्यवस्था करने जा रही है जिससे इन्हें समय से वेतन मिलेगा।
इसके लिए राज्य वित्त आयोग से जल संस्थानों को पैसा दिलाने की तैयारी है। नगर विकास विभाग ने इस संबंध में प्रस्ताव बनाकर विभागीय मंत्री मो. आजम खां को भेजा है।
उनकी मंजूरी के बाद इस संबंध में निर्णय किया जाएगा। इसके बाद लखनऊ, कानपुर, आगरा, वाराणसी, इलाहाबाद, झांसी और चित्रकूट के करीब 15 हजार अधिकारियों और कर्मचारियों को वेतन के लिए इंतजार नहीं करना पड़ेगा।
जल संस्थानों के आय का मुख्य स्रोत वाटर टैक्स है। इससे मिलने वाली रकम से ही जलापूर्ति की व्यवस्था की जाती है और अधिकारियों-कर्मचारियों को वेतन दिए जाते हैं।
कुछ जल संस्थानों को छोड़ दिया जाए तो अधिकतर की हालत खराब है। इसकी मुख्य वजह वाटर टैक्स की बराबर वसूली न हो पाना है।
इसलिए जल संस्थान चाहते हैं कि जब वे नगर विकास विभाग के अधीन आते हैं तो उन्हें भी शासन स्तर से मदद की जाए, जिससे वेतन के लाले न पड़ें।
नगर विकास विभाग ने इस संबंध में जल संस्थान के महाप्रबंधकों के साथ बैठक भी की थी। इसमें सुझाव आया कि जल संस्थानों का निकायों में विलय किया जा चुका है।
निकायों को राज्य वित्त आयोग से पैसा दिया जाता है, इसलिए उन्हें भी राज्य वित्त आयोग से पैसा दिया जाए। अगर अधिक पैसा नहीं दिया जा सकता है तो वेतन के बराबर ही पैसा दिया जाए।
इसके आधार पर ही नगर विकास विभाग ने प्रस्ताव तैयार कर विभागीय मंत्री को भेजा है। उनकी सहमति मिलने के साथ ही जल संस्थानों को राज्य वित्त आयोग से पैसा दिया जाने लगेगा।