लखनऊ। मरीज पर दवा का असर जानने के लिए एक अध्ययन पर्याप्त नहीं होता है। कई शोध पत्रों के विश्लेषण की जरूरत होती है। यही काम सिस्टमैटिक रिव्यू और मेटा-एनालिसिस करते हैं। केजीएमयू के मेडिसिन विभाग के अध्यक्ष डॉ. वीरेंद्र आतम ने बृहस्पतिवार को बेसिक्स ऑफ सिस्टमैटिक रिव्यू एंड मेटा-एनालिसिस विषयक सेमिनार में यह बात कही।
डॉ. वीरेंद्र ने कहा कि साक्ष्य आधारित इलाज के लिए अध्ययनों के निष्कर्षों को एक साथ जोड़कर विश्लेषण करना जरूरी है। इससे इलाज की प्रभावशीलता का ज्यादा भरोसेमंद आकलन संभव है। उन्होंने शोध पद्धति, डाटा चयन और सांख्यिकीय विश्लेषण की बारीकियों पर प्रकाश डाला।
विभाग के अध्यक्ष डॉ. आरके दीक्षित ने कहा कि व्यवस्थित समीक्षा और मेटा-एनालिसिस क्लीनिकल गाइडलाइन तैयार करने में भी मदद करते हैं। डॉ. राहुल ने कहा कि किसी एक शोध के आधार पर दवा लिखना उचित नहीं है।