पहले फर्जी फेसबुक एकाउंट बनाना और उसके बाद वर्दीधारी सेना के जवानों को जोड़कर कंपनियों के ऑनलाइन सर्वे के नाम पर महत्वपूर्ण जानकारी हासिल करना।
बदले में हर महीने जवान के बैंक खाते में 10 हजार रुपये जमा कराना। भारत में सक्रिय आसिफ जैसे दर्जनों आईएसआई एजेंट यही सब कर रहे हैं।
मेरठ से गिरफ्तार आईएसआई एजेंट आसिफ एक मोहरा है, जबकि उसके कई और साथी सेना के जवानों के संपर्क में हैं।
इन एजेंटों के जरिये ही लैपटॉप और महंगे मोबाइल फोन भी बतौर पुरस्कार जवानों के घर तक पहुंचाए गए हैं।
बनाते थे लड़की की फेक आईडी
आसिफ से हुई पूछताछ के बाद सेना की खुफिया इकाई को कई अहम जानकारियां मिली हैं।
आईएसआई भारतीय युवतियों के नाम पर फर्जी फेसबुक एकाउंट बनाने के बाद इसी फेसबुक आईडी से ऐसे जवानों की तलाश करती है जिन्होंने प्रोफाइल में अपनी फोटो लगा रखी है।
आईएसआई के इशारे पर जवानों से फेसबुक पर मीठी बातें कर उनसे ऑनलाइन सर्वे के नाम पर यूनिट की मूवमेंट जैसी जानकारियां तक हासिल की जा रही हैं।
हर महीने मिलते थे 10 हजार रुपये
जवानों को कोई शक न हो, इसके लिए उनके खाते में हर माह 10 हजार रुपये और पुरस्कार के रूप में मोबाइल फोन, टीवी और लैपटॉप उनके घर पहुंचाए जाते हैं।
जवान भी इसे सर्वे कंपनी की योजना बताकर अपने साथियों तक इसका प्रचार कर रहे हैं जिससे वे भी इससे जुड़ सकें। दिलचस्प बात यह है कि ये सब इतनी शातिर तरीके से होता था कि किसी जवान को भनक तक नहीं लग पाती थी कि उसे बुरी तरह आईएसआई के जाल में फंसाया जा रहा है।
जवानों को सैर भी कराती है आईएसआई
यही नहीं, आईएसआई जवानों को विदेश की सैर का भी प्रलोभन देती है। पिछले दिनों हैदराबाद में पकड़े गए एक जेसीओ की फेसबुक आईडी जब सेना की खुफिया इकाई ने देखी तो उसके होश उड़ गए।
ऑनलाइन सर्वे के नाम पर दूसरी ओर से जानकारी जुटा रही एक महिला ने अपनी नग्न वीडियो तक भारतीय जवान के फेसबुक पर अपलोड कर दी थी।
उसे अपने साथ लंदन घुमाने का ऑफर भी दिया गया था। सूत्रों के मुताबिक सेना जल्द ही कई और जवानों व इसमें शामिल आईएसआई एजेंट का पता लगाएगी। वहीं, रविवार होने के बावजूद मध्य कमान मुख्यालय में खासी गहमागहमी रही। इस मामले को लेकर वरिष्ठ अधिकारी दिन भर बैठकें करते रहे।
सेना ने जवानों को चेताया
सेना ने एक बार फिर अपने जवानों और अफसरों को फेसबुक आईडी बनाने और व्हाट्सअप अकाउंट खोलने को लेकर एहतियात बरतने के आदेश दिए हैं।
इंटीग्रेटेड मुख्यालय ने सभी रेजीमेंट, बटालियन और यूनिट को अपने यहां के जवानों को वर्दी में खिंची फोटो फेसबुक पर न लगाने और अपने नाम की आईडी का इस्तेमाल न करने के निर्देश दिए हैं।
हालांकि मध्य कमान मुख्यालय के अधिकारी इस पर कुछ भी बोलने को तैयार नहीं हैं।