मनरेगा के काम में सिंचाई विभाग फिसड्डी साबित हो रहा है। इसके तहत विभाग में जो काम मंजूर थे, उनकी प्रगति काफी खराब है।
इस पर सरकार ने कड़ी नाराजगी जताई है। जिन अभियंताओं के क्षेत्र में सबसे कम काम हुए हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई की भी तैयारी चल रही है।
सिंचाई विभाग में बांधों की मरम्मत, नहरों की सिल्ट सफाई जैसे कई काम मनरेगा से कराए जाते हैं। इसके लिए ग्राम्य विकास विभाग से सिंचाई विभाग को पैसा भी मिलता है। हर साल इसके लिए बजट आवंटित होता है।
इसी बजट के अनुसार सिंचाई विभाग अपने अलग-अलग संगठनों को लक्ष्य निर्धारित करता है। इस वित्तीय वर्ष के नौ महीने बीत चुके हैं लेकिन कई स्थानों पर एक तिहाई से लेकर आधा काम ही हुआ है।
ऐसे में बचे हुए तीन महीने में निर्धारित लक्ष्य को पूरा कर पाना संभव नहीं है। सबसे खराब हाल गाजीपुर, चंदौली, जौनपुर, वाराणसी, गोरखपुर, फैजाबाद, गोंडा, फीरोजाबाद आदि जनपदों का है।
कई मंडलों के आयुक्तों ने भी मनरेगा के अंतर्गत उपलब्ध कराई गई राशि की तुलना में काफी कम काम कराए जाने की शिकायत सरकार से की है। अब इस मामले में सीधे अभियंताओं को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है।
गंडक-गोरखपुर, सोन, सरयू-1 फैजाबाद व सरयू-2 गोंडा में मनरेगा के कामों की स्थिति बहुत ही खराब है। इस पर सरकार ने कड़ी नाराजगी जताई है।
विशेष सचिव सिंचाई सीएल सिंह ने प्रमुख अभियंता व विभागाध्यक्ष को भेजे पत्र में इन चारों संगठनों के मुख्य अभियंताओं के नाम व कार्यकाल का विवरण मांगा है।
किसके कार्यकाल में सबसे कम प्रगति हुई है, इसकी भी जानकारी तलब की है। साथ ही जिन जिलों की खराब प्रगति है, उनके यहां के सिंचाई विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों के नाम मांगे गए हैं।
सरकार दोषी अधिकारियों व अभियंताओं के खिलाफ कार्रवाई करने का मन बना रही है।