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ईरान संकट: लखनऊ की शादियों और रेस्टोरेंट पर पड़ा सीधा असर, सिर्फ बड़े होटलों को हो रही है गैस सप्लाई

Tue, 10 Mar 2026 09:47 PM IST
रोहित मिश्र अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ

सार

Cylinder shortage: गैस सिलिंडर न मिलने से यूपी की राजधानी लखनऊ में होने वाली शादियों और रेस्टोरेंट के व्यवसाय पर सीधा असर पड़ा है। 
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गैस सप्लाई का रेस्टोरेंट पर पड़ा असर। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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सहालग के सीजन में कॉमर्शियल सिलिंडर की आपूर्ति पर लगी रोक ने कैटरिंग कारोबारियों समेत शादी वाले घरों के लोगों की धड़कनें बढ़ा दी हैं। बुधवार को अकेले लखनऊ में ही करीब 1200 शादियां हैं। सिलिंडर न मिलने से इन शादियों के सुस्वादु प्रीतिभोज पर ग्राहण लग गया है। कैटरिंग कारोबारी बताते हैं कि गैस एजेंसियां सिर्फ बड़े होटलों का स्टॉक मेंटेन करने में लगी हैं। छोटे कारोबारी सड़क पर आ गए हैं। उधर, व्यापारियों के दबाव में एजेंसियां शादी वाले घरों में इक्का-दुक्का सिलिंडर देने पर राजी हुए हैं।

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कैटरिंग कारोबार से जुड़े संतोष गुप्ता, संजीव सिंह, मोहित कुमार, अभय प्रताप ने बताया कि सिलिंडर न मिल पाने से बड़ी समस्या खड़ी हो गई है। टेढ़ी पुलिया के संतोष गुप्ता ने बताया कि 16 मार्च तक लगातार शादियों और रिसेप्शन की बुकिंग है। बताया कि किसी तरह मांग मांगकर मंगलवार की बुकिंग के लिए सिलिंडर जुटाए लेकिन बुधवार की बुकिंग के लिए कोई तरकीब काम नहीं आ रही है। गोमतीनगर के संजीव सिंह बताते हैं कि बुकिंग सिर पर है समझ नहीं आ रहा कि कैसे निपटाएं। क्योंकि, शादी वाले घरों ने तो बुकिंग करा ली थी। इसके बाद उनसे कोई मतलब नहीं रहता है। ऐसे में वह हम पर दबाव बना रहे हैं एजेंसियों ने हाथ खड़े कर दिए हैं। बुकिंग वालों ने अपने फोन स्विच ऑफ कर लिए हैं।

उधर, कुछ कैटरिंग कारोबारियों ने बताया कि शादी वाले परिवारों की खुशी में खलल न पड़े इसके लिए एजेंसियों ने थोड़ी सी राहत दी है। चार सिलिंडर की जरूरत है तो एक-दो सिलिंडर देने की बात कही जा रही है, लेकिन इससे भी काम पूरा नहीं पड़ रहा है।

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कामर्सिलय सिलिंडर ठप, चटोरी गली के 40 दुकानों पर ताला

राजधानी के 1090 चौराहा स्थित चटोरी गली में मंगलवार को कामर्सिलय सिलिंडर के अभाव में करीब 40 दुकानों पर ताला लगा दिया गया। इसकी वजह से यहां एक दिन में करीब 10,0000 रुपये का कारोबार ठप हुआ। इतना ही नहीं इससे जुड़े दुकानदार और कर्मी पर आर्थिक बोझ भी बढ़ती नजर आईं।

इस्राइल ईरान के बीच चल रहे युद्ध की वजह से राजधानी में आर्थिक, व्यावसायिक और नियमित कारोबार पर भी असर देखने को मिल रहा है। मंगलवार को राजधानी में बड़ी संख्या में रेस्टोरेंट, फूटपाथ की दुकानें प्रभावित हुईं। इतना ही नहीं राजधानी में छोटे-छोटे स्तर पर लगने वाली दुकानें भी बंद नजर आईं।

चटोरी गली हॉकर एसोसियशन के अध्यक्ष विक्रम सिंह यादव ने बताया कि चटोरी गली में 140 दुकानें पंजीकृत हैं। मंगलवार को कामर्सियल सिलिंडर खत्म होने और न मिलने की वजह से करीब 40 दुकानें बंद रहीं। जबकि कुछ दुकानें घरेलू गैस और अन्य छोटे सिलिंडर से जैसे तैसे संचालित की गई। जबकि, कुछ दुकानों पर नाम मात्र के सिलिंडर बचे थे।

एसोसियशन के उपाध्यक्ष अविनाश कुमार ने बताया कि सिलिंडर की कमी से जो दुकानें बंद रही हैं उनमें से कुछ दुकानदार और कर्मी दूसरे काम के तलाश में लग गए है। यदि स्थिति ऐसी ही रही तो एक दो दिन में सभी दुकानें बंद हो जाएंगी। उन्होंने बताया कि यहां एक दिन में एक दुकान से 1500 से 3000 रुपये तक का करोबार होता है। उनमें व्यवस्था और साफ सफाई कर्मी का वेतन व अन्य शामिल है। यदि दुकानें बंद रहेंगी तो सभी स्तर पर प्रभाव पड़ेगा। सरकार से यही चाहते हैं कि किसी न किसी तरह का रास्ता निकालें।

सिर्फ बड़े होटलों को ही दी जा रही मदद

उत्तर प्रदेश टेंट कैटरर्स एंड डेकोरेटर वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष विजय कुमार का कहना है कि एंजेंसियां सिर्फ बड़े होटलों का स्टॉक मेंटेन कर रही है। एजेंसियों के पास जो स्टॉक है वह बड़े होटलों के लिए आरक्षित कर लिया गया है। व्यापारियों को चार-चार हजार रुपये देने पर भी कहीं सिलिंडर नहीं मिल पा रहा है। छोटे कैटरिंग कारोबारी सड़क पर आ गए हैं। 15 मार्च तक शादियों का सीजन है। बुधवार को ही लखनऊ में 1200 शादियां हैं। कैटरिंग कारोबारियों को समझ नहीं आ रहा है कि वह अपनी साख और शादी वाले घरों की रौनक कैसे बचाए रखें। सरकार अगर कोई व्यवस्था नहीं करेगी तो खान पान से जुड़े व्यापारी बेरोजगार हो जाएंगे।
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गैस सप्लाई डगमगाई तो राजधानी में भट्ठियों की आंच हुई तेज

 खाड़ी देशों में जारी युद्ध का असर अब लखनऊ की रसोइयों तक महसूस होने लगा है। कुकिंग गैस की आपूर्ति प्रभावित होते ही शहर के छोटे-बड़े खानपान कारोबारियों ने पुराना लेकिन देसी और कारगर तरीका फिर अपना लिया है- कोयले की भट्ठियां, फिर जल उठीं। 

राजधानी की कई चाय स्टाॅल और फास्ट फूड की दुकानों पर इन दिनों फिर से भट्ठियों की आंच जलती नजर आ रही है। मंगलवार को अमर उजाला की पड़ताल में सामने आया कि गैस की कमी ने रेस्टोरेंट, चाय-नाश्ते की दुकानों व मिठाई आदि के कारोबारियों को विकल्प तलाशने पर मजबूर कर दिया है। बड़ी संख्या में दुकानदार अब गैस की जगह कोयले की भट्ठियों पर चाय, समोसे और पकौड़े तैयार कर रहे हैं।

न्यू हैदराबाद निवासी रेस्टोरेंट संचालक अनीश कुमार गुप्ता ने बताया कि मेरे यहां पहले भी चाय बनाने के लिए भट्ठी का इस्तेमाल होता था और सोंधे स्वाद की वजह से इसकी मांग अच्छी रहती थी। अब फिर से भट्ठी गुलजार कर ली है।
फास्ट फूड कारोबारी चंद्रप्रकाश का कहना है कि हालात देखते हुए उन्होंने भट्ठी पर काम शुरू कर दिया है और एहतियात के तौर पर कोयले का पर्याप्त स्टॉक भी मंगा लिया है। खाड़ी क्षेत्र में चल रहे युद्ध के कारण गैस सप्लाई पर इतना असर पड़ेगा, इसकी उम्मीद नहीं थी।

खान पान का 60 फीसदी कारोबार बंद
 कॉमर्शियल गैस सिलिंडर की आपूर्ति थमने से राजधानी में खान पान से जुड़े 70 फीसदी व्यापारी सड़क पर आ गए हैं। चौक के पारंपरिक बाजार से लेकर बड़े बड़े मॉल के फूड कोर्ट तक प्रभावित हुए हैं। इसके अलावा चौक से लेकर हजरतगंज तक और हजरतगंज से लेकर गोमतीनगर तक रेहड़ी पटरी वाली खानपान की दुकानें भी बंद रही। रोजी रोटी के लिए कुछ दुकानदार घरेलू गैस सिलिंडर से काम चलाते नजर आए। इससे घरेलू गैस सिलिंडर के लिए भी मारामारी रही। कारोबारी बताते हैं कि गैस की किल्लत से बुधवार को पूरी तरह से खान पान व्यापार बंद होने की आशंका है।  
 
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