लखनऊ। इलाज के दौरान महिला की मौत के पांच महीने बाद जांच कमेटी ने गोमतीनगर स्थित आईपीएस अस्पताल को दोषी ठहराया है। अस्पताल प्रशासन ने इलाज से जुड़े कोई दस्तावेज नहीं दिए। ऐसे में कमेटी ने उसे दोषी ठहराते हुए रिपोर्ट मानवाधिकार आयोग को भेज दी है। वहां से निर्देश मिलते ही अस्पताल पर नकेल कसी जाएगी।
बाराबंकी के सतरिख भटौली गांव निवासी संजय की पत्नी रोशनी (24) को बीते वर्ष 27 सितंबर को बुखार व सिर दर्द की शिकायत पर परिजनों ने आईपीएस अस्पताल में भर्ती कराया था। डॉक्टरों ने सीटी स्कैन समेत खून से जुड़ी जांच कराई। संजय का आरोप है कि जांच रिपोर्ट सामान्य आने के बावजूद इलाज में कोताही बरती गई, जिससे रोशनी की हालत बिगड़ गई थी। वसूली के खातिर मरीज को आईसीयू में शिफ्ट कर दिया, जहां उसकी मौत हो गई थी।
अस्पताल ने 1.20 लाख रुपये का बिल थमाया, जिसमें से 90 हजार रुपये वसूल भी लिए। संजय ने थाने में तहरीर दी। पुलिस ने सीएमओ कार्यालय से जांच रिपोर्ट के बाद प्राथमिकी दर्ज करने की बात कही। कई महीने बाद भी स्वास्थ्य विभाग ने जांच तक नहीं कराई तो संजय ने उप्र. मानवाधिकार आयोग का दरवाजा खटखटाया।
आयोग ने डीएम और सीएमओ को पत्र भेजकर 12 जनवरी को मामले की जांच रिपोर्ट तलब की। कमेटी ने अस्पताल से इलाज से जुड़े दस्तावेज मांगने के साथ डॉक्टर को बयान दर्ज करने के लिए बुलाया। आरोप है कि अस्पताल ने कोई भी दस्तावेज नहीं दिए। ऐसे में कमेटी ने अस्पताल को दोषी ठहराया है। सीएमओ डॉ. एनबी सिंह का कहना है जांच रिपोर्ट मानवाधिकार आयोग भेज दी गई है।