आईपीएस एसोसिएशन ने मुजफ्फरनगर दंगों पर जस्टिस विष्णु सहाय की रिपोर्ट खारिज कर दी है। एसोसिएशन ने कहा कि जांच रिपोर्ट में आईपीएस अफसर सुभाष दुबे व एलआईयू के इंस्पेक्टर प्रबल प्रताप सिंह को गलत तरीके से दोषी ठहराया गया है।
सुभाष दुबे केवल चंद दिन ही मुजफ्फरनगर जिले के एसएसपी थे जबकि दंगा चार जिलों में फैला था। आईपीएस एसोसिएशन जल्द ही इस जांच रिपोर्ट के खिलाफ मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से मिलेगा। इसके लिए सोमवार को आईपीएस अफसर मुख्यमंत्री से समय मांगेंगे।
आईपीएस एसोसिएशन के सचिव व आईजी एडमिन प्रकाश डी ने बताया कि उन लोगों ने मुजफ्फरनगर दंगों पर गठित जस्टिस विष्णु सहाय की जांच रिपोर्ट को बहुत ध्यान से अध्यन किया।
इसमें आईपीएस अफसर सुभाष दुबे व एलआईयू के इंस्पेक्टर प्रबल प्रताप सिंह को गलत तरीके से दोषी ठहराया गया है। खास बात यह है कि सुभाष दुबे का बयान तक जांच रिपोर्ट में शामिल नहीं किया गया है। जबकि उनसे 27 पेज का बयान लिया गया था।
सिर्फ एक को ही दोषी ठहराना ठीक नहीं...
दरअसल, 27 अगस्त 2013 को मुजफ्फरनगर के कवाल में तीन लोगों की हत्या के बाद मंजिल सैनी को हटाकर सुभाष दुबे को मुफ्फरनगर जिले का एसएसपी बनाया गया था।
उन्होंने 28 अगस्त की शाम को वहां ज्वाइन किया था। वे केवल चंद दिन ही वहां के एसएसपी रहे थे। जबकि दंगा मुजफ्फरनगर, शामली, सहारनपुर व बागपत चार जिलों में हुआ था। इसलिए सिर्फ एक को ही दोषी ठहराया जाना ठीक नहीं है।
इसी प्रकार एलआईयू के इंस्पेक्टर प्रबल प्रताप सिंह ने भी अपनी रिपोर्ट में नंगला मंदौड़ में होने वाली पंचायत में 15 से 20 हजार लोगों के पहुंचने की संभावना जताई थी। यह बात सही है कि वहां इससे ज्यादा की तादाद में लोग पहुंचे। लेकिन इस मामले में केवल एलआईयू के एक इंस्पेक्टर को जिम्मेदार ठहराना ठीक नहीं है। क्योंकि इसमें बहुत सारे लोग और भी शामिल होते हैं।
इतने बड़े दंगे में सिर्फ दो ही दोषी कैसे?
एसोसिएशन के सचिव ने बताया कि बैठक में यह तय किया गया कि इस मामले को लेकर आईपीएस अफसर सोमवार को मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से समय मांगेंगे।
उनका समय जिस दिन मिलेगा उसी दिन एसोसिएशन अपना एक ज्ञापन उन्हें सौंपेगा। इसमें यह कहा जाएगा कि इतने बड़े दंगे के लिए केवल दो को ही प्वाइंट आउट करना उचित नहीं है।
इस बैठक में आईपीएस एसोसिएशन के अध्यक्ष डीजी होमगार्ड रंजन द्विवेदी, उपाध्यक्ष एडीजी ट्रेनिंग बीके मौर्य, सचिव आईजी एडमिन प्रकाश डी, एडीजी जेल देवेन्द्र सिंह चौहान, एडीजी ट्रैफिक अनिल अग्रवाल, आईजी संजय सिंघल, आईजी एटीएस असीम अरूण, आईजी लोक शिकायत अशोक मुथा जैन, एसपी एटीएस रोहन व एसपी एसटीएफ पवन कुमार मुख्य रूप से उपस्थित थे।