डेढ़ माह का कठोर प्रशिक्षण, जोखिम भरे सफर की थकान और आंखों में एवरेस्ट को फतह करने की खुशी। कुछ ऐसे ही मिले-जुले भाव आईपीएस अपर्णा कुमार के चेहरे पर देखे जा सकते हैं। अब तक छह महाद्वीप की सबसे ऊंची चोटी को फतह कर चुकीं अपर्णा 21 मई को माउंट एवरेस्ट पर तिरंगा लहराने के बाद बुधवार को अपने घर लखनऊ लौटीं।
कहती हैं कि बीते डेढ़ महीने में याद ही नहीं कि कब दिन हुआ और कब रात हो गई। हां, बच्चों, पति और घर की बहुत याद आती थी, लेकिन इसी छोटे से परिवार ने हिम्मत दी और चोटी फतह कर ली। एवरेस्ट फतेह से जुड़ी यादें और अगले अभियान की योजनाएं को उन्होंने ‘अमर उजाला’ से साझा कीं।
जो रास्ता हमने चुना वो काफी टफ था
एवरेस्ट पर हिमालय हुए हौसले
सवाल : एवरेस्ट अभियान अन्य से कैसे अलग रहा?
अब तक का सबसे मुश्किल सफर रहा है। हमने चढ़ाई के लिए चाइना-तिब्बत के नॉर्थ फेज को चुना था। यहां हेलीकॉप्टर सेवा नहीं है। मुश्किल में यदि आप फंस गए तो रेस्क्यू भी बहुत मुश्किल है। दरअसल, इस रास्ते पर चुनौतियां ज्यादा लेकिन क्राउड कम है, यही वजह है कि हमने इस रास्ते को चुना। हालांकि अंटकार्टिका महाद्वीप में माउंट विनसन अभियान भी टफ था, लेकिन एवरेस्ट सबसे मुश्किल रहा।
सवाल : किस तरह की चुनौतियां आईं रास्ते में, सबसे कठिन समय कौन सा था?
जैसा कि मैंने कहा कि हमने जिस रास्ते को चुना, वह काफी टफ था। इस बीच मुझे डायरिया भी हो गया था। जितनी ऊर्जा चढ़ाई के लिए चाहिए थी, उतनी ही एनर्जी की जरूरत उतरते वक्त थी। चढ़ने में ही हमने अपनी सारी एनर्जी लगा दी थी। थकान बुरी तरह हावी थी। रैपलिंग के दौरान मैं पूरी तरह से उलटे लटक चुकी थी। उस दौरान जाना ‘डर क्या होता है’। कैंप में वापस आने के बाद मैंने ‘चोमूलुंगमा देवी’ (नेपाल की देवी) का शुक्रिया अदा किया।
सवाल : एवरेस्ट के बाद, अब आगे क्या?
सातों महाद्वीप की सबसे ऊंची चोटियों तक जाना मेरा लक्ष्य है। एवरेस्ट के साथ छह सबसे ऊंची चोटी तक जा चुकी हूं, अब उत्तरी अमेरिका में माउंट देनाली अगला टारगेट है। यह 20,237 फीट ऊंची चोटी है। 2017 में अभियान पर निकलूंगी। फिलहाल कुछ दिन आराम करने के तुरंत बाद ट्रेनिंग शुरू कर दूंगी।
सवाल : नौकरी, परिवार और पहाड़, कैसे इन तीनों के बीच सामंजस्य बैठाती हैं।
सबकी अपनी-अपनी प्राथमिकताएं हैं। मेरे लिए तीनों अहम हैं। समय प्रबंधन और अनुशासन, दो ऐसी चीजें हैं, जिनके कारण आपकी प्राथमिकताएं कभी आपस में टकराती नहीं हैं।
बच्चे कहते हैं, मम्मा पहाड़ पर गई है
अपर्णा कुमार
अपर्णा कहती हैं कि होमसिकनेस मुझे भी है। वहीं न तो खाने को ठीक से मिल पाता है न ही घर के लोग आपके आसपास होते हैं। घर लौटने के बाद जो सुकून महसूस कर रही हूं, उसे शब्दों में बयां करना मुश्किल है। मेरे दोनों बच्चे अभी बहुत छोटे हैं। जब भी मैं अभियान पर निकलती हूं, तो उन्हें यह पता होता है कि मां पहाड़ पर गई है और आने के बाद, मां पहाड़ से लौट आई।
लड़कियां अक्सर शादी की उम्र निकल जाने जैसी सोच लेकर उलझी रहती हैं। मेरा मानना है कि अब ‘एज नो बार’। कॅरिअर, अपने शौक और जुनून से समझौते मत कीजिए। सपने देखिए और उन्हें पूरा करने के लिए जुट जाइए। फिर हर बाधा खुद-ब-खुद रास्ता देने लगेगी।
यूपी पुलिस की 2002 बैच की आईपीएस अफसर हैं अपर्णा कुमार। मूलत: केरला की रहने वाली हैं। वर्तमान में लखनऊ में रह रही हैं। पति संजय कुमार इलाहाबाद में डीएम हैं। अपर्णा का सपना है सात महाद्वीपों की सबसे ऊंची चोटियों पर झंडा फहराना।
इससे पहले यहां लहराया तिरंगा
- यूरोप महाद्वीप की सबसे ऊंची चोटी माउंट एलब्रस। माइनस 15 डिग्री सेल्सियस पर तापमान पर एलब्रश पर तिरंगा लहराने वाली पहली भारतीय महिला अफसर।
- अफ्रीका की माउंट किलमंजारो को किया फतह।
- ऑस्ट्रेलिया की सबसे ऊंची चोटी कारस्टेंज पिरामिड पर लहराया तिरंगा।
- साउथ अमेरिका के माउंड अंकारागुआ पर पहुंचीं।
- माउंट विनसन, अंटकार्टिका महाद्वीप की सबसे ऊंची चोटी को भी किया फतह।