फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बर्खास्त दरोगा की गिरफ्तारी के साथ खड़ा हुआ सरकारी आवास का सवाल, अब जांच में उधड़ेंगी परतें

Thu, 14 Mar 2019 03:20 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क, अमर उजाला लखनऊ
विज्ञापन
श्रवण साहू - फोटो : amar ujala
विज्ञापन
लखनऊ में सआदतगंज के तेल व्यवसायी श्रवण साहू को फर्जी मुकदमे में फंसाने की साजिश के तहत चार बेगुनाहों को शूटर बताकर जेल भेजने में बर्खास्त इनामी दरोगा धीरेंद्र शुक्ला की गिरफ्तारी के साथ उसके सरकारी आवास का सवाल खड़ा हो गया है।
विज्ञापन


श्रवण साहू कांड में अब बर्खास्त दरोगा के सरकारी आवास की जांच शुरू हुई है। ऐसे में फिर कई पुलिसकर्मियों पर गाज गिरने के आसार बन चले हैं। एक ओर पूरे जिले में किरायेदारों के सत्यापन का अभियान चलाया जा रहा है और पुलिस थाना परिसर स्थित आवास में रह रहे इनामी से बेखबर थी।

हिस्ट्रीशीटर अकील अंसारी ने जनवरी 17 के पहले सप्ताह में श्रवण साहू को फर्जी मुकदमे में फंसाने के लिए चार बेगुनाहों को शूटर बताकर जेल भेजने की साजिश रची थी। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक की स्वाट टीम के प्रभारी दरोगा धीरेंद्र कुमार शुक्ला ने 10 जनवरी 17 की रात आरक्षी अनिल सिंह व धीरेंद्र यादव और अन्य पुलिसकर्मियों के साथ मिलकर चारों युवकों की असलहों के साथ गिरफ्तारी दिखाई।
विज्ञापन


उन्हें सीरियल किलर सलीम, रुस्तम व सोहराब का शूटर बताया और अकील अंसारी की हत्या के लिए श्रवण साहू की ओर से सुपारी दिए जाने की पटकथा सुनाई। साजिश का भांडा फूटने पर तत्कालीन वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक मंजिल सैनी ने 19 जनवरी 17 को आरक्षी धीरेंद्र यादव व अनिल सिंह की बर्खास्तगी के आदेश जारी किए और दरोगा धीरेंद्र शुक्ला की बर्खास्तगी के लिए डीआईजी से संस्तुति की।

बर्खास्तगी के बाद भी मेहरबान रही पुलिस

धीरेंद्र शुक्ला - फोटो : amar ujala
मातहतों की करतूत से शर्मसार मंजिल सैनी ने साजिश में शामिल धीरेंद्र शुक्ला, धीरेंद्र यादव और अनिल सिंह की बर्खास्तगी के साथ पांच पुलिसकर्मियों को निलंबित व चार को लाइनहाजिर किया। चारों पीड़ितों के मुकदमे दर्ज कराने के साथ आरोपियों पर सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया।

क्षेत्राधिकारियों को विवेचना सौंपी, लेकिन बर्खास्त दरोगा धीरेंद्र शुक्ला अलीगंज थाना परिसर स्थित सरकारी आवास में जमा रहा। कप्तान से लेकर प्रतिसार निरीक्षक तक ने इसे खाली कराने की जरूरत नहीं समझी। एक फरवरी 17 को श्रवण साहू की हत्या होने पर बर्खास्त पुलिसकर्मियों से भी तहकीकात के साथ उनकी गतिविधियों की छानबीन की गई, लेकिन सरकारी आवास को अनदेखा किया गया।

आवास खाली करने को अधिकतम तीन माह का मौका

अनिल सिंह और धीरेंद्र यादव ( अभी तक फरार) - फोटो : amar ujala
पुलिसकर्मी को नौकरी से निकाले जाते ही सरकारी आवास खाली कराने का नियम है, लेकिन परिवार को देखते हुए उसे तीन महीने का समय दिया जाता है। तत्कालीन वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक मंजिल सैनी ने तीनों पुलिसकर्मियों को 19 जनवरी 17 को बर्खास्त किया और 27 अप्रैल 17 को उनका तबादला हुआ।

इस दौरान बर्खास्तगी के तीन महीने पूरे हो चुके थे। इसके बाद कप्तान बने दीपक कुमार ने फरार बर्खास्त पुलिसकर्मियों की तलाश के आदेश दिए, फिर राजधानी के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक बने कलानिधि नैथानी ने सख्ती की।

श्रवण साहू कांड में फरार तीनों पुलिसकर्मियों पर 31 जनवरी 19 को इनाम घोषित किया, लेकिन दरोगा धीरेंद्र कुमार शुक्ला के सरकारी आवास में जमे होने से बेखबर रहे। इनामी की गिरफ्तारी से चंद घंटे पहले अलीगंज थाना परिसर में उसके सरकारी आवास की भनक लगी।

जांच में नपेंगे पुलिसकर्मी

कलानिधि नैथानी - फोटो : डेमो
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने प्रतिसार निरीक्षकों को पुलिस लाइन, विभिन्न थाने और अन्य स्थानों पर पुलिस आवासों के सत्यापन के आदेश दिए हैं। पता लगाया जाएगा कि आवास किस पुलिसकर्मी के नाम कब से आवंटित है, उसकी तैनाती कहां है और आवास में कौन रह रहा है। बिजली का बिल व अन्य कटौती किस तरह से हो रही है।

बर्खास्त दरोगा धीरेंद्र शुक्ला के सरकारी आवास को लेकर एसएसपी कलानिधि नैथानी ने जांच शुरू कराई है। सवाल उठा कि धीरेंद्र के सरकारी आवास के रखरखाव के लिए रकम कैसे जमा हुई और बिजली का बिल आदि किसने अदा किया? संबंधित अधिकारी दो साल तक बेखबर क्यों बने रहे?

इस दौरान राजधानी में तैनात रहे प्रतिसार निरीक्षकों ने सरकारी आवासों में रह रहे पुलिसकर्मियों का सत्यापन किस तरह किया। आवासों की स्थिति की उच्चाधिकारियों को आख्या भेजने में लापरवाही बरती गई। इसी तरह, फरार बर्खास्त दरोगा धीरेंद्र शुक्ला और आरक्षी धीरेंद्र यादव व अनिल सिंह की सरगर्मी से तलाश का दावा करने वाले पुलिसकर्मी भी बेचैन हो उठे हैं।

मुकदमे दर्ज होने के बाद कितनी बार और किन स्थानों पर दबिशें दी गईं। खास बात यह है कि विवेचना में तीनों के मूल पते दर्ज कर तलाश की जा रही थी। इसके मुताबिक,  धीरेंद्र कुमार शुक्ला गोरखपुर के झगहा थाने के बैजूडीह, धीरेंद्र यादव आगरा के खेड़ा राठौर थाने के करनडरा और अनिल सिंह सुल्तानपुर के दोस्तपुर थाने के भदिला का निवासी है।
विज्ञापन

जेल गया बर्खास्त दरोगा, अन्य की तलाश

धीरेंद्र शुक्ला - फोटो : amar ujala
कप्तान ने विवेचक से मांगा स्पष्टीकरण
श्रवण साहू कांड में एक बार फिर महकमे की फजीहत होते देख वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक कलानिधि नैथानी ने विवेचना कर रहे क्षेत्राधिकारी चौक से स्पष्टीकरण मांगा है। बर्खास्त दरोगा धीरेंद्र शुक्ला के सरकारी आवास व अन्य बिंदुओं पर जवाब तलब करने के साथ विवेचना के जल्द निस्तारण के आदेश दिए हैं।

ठाकुरगंज पुलिस ने गिरफ्तार बर्खास्त दरोगा धीरेंद्र कुमार शुक्ला को बुधवार को न्यायालय में पेश किया। मजिस्ट्रेट ने उसे न्यायिक हिरासत में लेकर जेल भेज दिया। इस बीच विवेचकों ने धीरेंद्र शुक्ला से पूछताछ और फरार बर्खास्त सिपाही अनिल सिंह व धीरेंद्र यादव की नए सिरे से तलाश शुरू की है।  

पीड़ितों पर समझौते का दबाव
श्रवण साहू को फंसाने के लिए शूटर बताकर जेल भेजे गए चारों युवकों में से एक के भाई ने ‘अमर उजाला’ को बताया कि आरोपी पुलिसकर्मियों की ओर से पीड़ितों पर समझौते का दबाव बनाया जा रहा था। जेल की हवा खा चुके चारों बेगुनाहों के साथ उनके परिवारीजन व गवाह भी सहमे थे। इस बीच धीरेंद्र शुक्ला की गिरफ्तारी से हड़कंप मच गया।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें