हाई सिक्योरिटी जोन में शुक्रवार शाम हाईकोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस और मानवाधिकार आयोग के सदस्य यूके धवन की कार पर फायरिंग का राज राजधानी की हाईटेक पुलिस चौबीस घंटे बाद भी नहीं सुलझा सकी।
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शनिवार दोपहर डेढ़ घंटे तक पुलिस अफसरों, फॉरेंसिक टीम और बैलिस्टिक एक्सपर्ट्स ने घटनास्थल पहुंचकर क्राइम सीन का री-कंस्ट्रक्शन किया लेकिन गोली कहां से आई और किसने चलाई, यह पता नहीं लग सका।
जस्टिस की कार पर फायरिंग की वारदात की तह तक पहुंचने के लिए सुबह से ही पुलिस अफसर दौड़ते रहे। डीआईजी आरकेएस राठौर, फॉरेंसिक लैब के डॉयरेक्टर एसबी उपाध्याय सहित गौतमपल्ली पुलिस ने जस्टिस के गोखले मार्ग स्थित आवास जाकर उनसे घटनाक्रम की जानकारी ली। कार में मौजूद गनर दानवीर और ड्राइवर अखिलेश से पूछताछ की।
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दोपहर ठीक 3.50 पर फॉरेंसिक लैब के डायरेक्टर एसबी उपाध्याय फॉरेंसिक टीम के साथ बैलिस्टिक एक्सपर्ट्स को लेकर घटनास्थल पहुंचे। जस्टिस की कार भी मौके पर बुलवाकर क्राइम सीन का री-कंस्ट्रक्शन कराया गया।
डेढ़ घंटे तक डीआईजी रेंज आरकेएस राठौर, एएसपी पूर्वी शिवराम यादव और फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स कार की पोजीशन और गोली की दिशा का अध्ययन करते रहे।
डेढ़ घंटे चला री-कंस्ट्रक्शन, रोका गया ट्रैफिक
क्राइम सीन का रिकंस्ट्रक्शन करीब डेढ़ घंटे तक चला। इस दौरान लामार्टिनियर और गोल्फ क्लब तिराहा से आने वाला ट्रैफिक रुकवा दिया गया।
एसबी उपाध्याय ने टेनिस कोर्ट के सामने ठीक उसी जगह पर जस्टिस की कार खड़ी कराई जहां गोली लगी थी। क्राइम सीन का री-कंस्ट्रक्शन शुरू करने से पहले एसबी उपाध्याय ने जस्टिस के गनर दानवीर और ड्राइवर अखिलेश से पूरा घटनाक्रम समझा।
50 किमी थी कार की स्पीड, गोली ड्राइवर और गनर के बीच से निकली
ड्राइवर ने बताया कि गोली शीशे से टकराई और उसके व बगल में बैठे गनर दानवीर के बीच से होती हुई पिछली सीट पर गिर पड़ी। जस्टिस के टोकने पर ड्राइवर ने आगे कार रोक दी। एसबी उपाध्याय ने बताया कि कार की स्पीड 50 किलोमीटर के आसपास थी। शीशे पर गोली लगने के बाद ब्रेक लगाते-लगाते कार करीब साढ़े सात मीटर आगे तक गई।
गोली ऊपर से नीचे आई, उसमें क्षमता भी कम थी
फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स का कहना है कि फायरिंग का राज जानने के लिए कार की स्पीड और बुलेट के एंगल का गुणा-भाग किया जा रहा है।
कार के शीशे पर गोली के एंट्री पॉइंट को देखकर एक्सपर्ट्स यह मान रहे हैं कि गोली ऊपर से नीचे गिरते हुए आई है। जिस वक्त गोली कार के शीशे से टकराई, उसमें बिल्कुल भी क्षमता नहीं थी।
कार 50 किमी की स्पीड से दौड़ रही थी इसलिए टूटा शीशा
अगर कार सामान्य अवस्था में खड़ी होती तो शायद गोली से शीशा टूटता ही नहीं।
चूंकि, कार 50 या उससे कुछ ज्यादा की स्पीड से चल रही थी इसलिए गोली से शीशा टूट गया। भीतर पिछली सीट पर गोली गिरी मिली है। अगर उसमें गति होती तो नरम सीट पर गोली धंस जाती।
ऑटोमेटिक रायफल से चली गोली, टकराकर कार में लगी
कार में मिली बुलेट की गहराई से छानबीन करने के बाद फॉरेंसिक डॉयरेक्टर एसबी उपाध्याय ने बताया कि गोली किसी ऑटोमेटिक रायफल से चली है।
उन्होंने कहा कि कार के शीशे का क्षतिग्रस्त हिस्सा और बुलेट की स्थिति देखकर यह अंदाजा लगाया जा रहा है कि गोली 250 मीटर की दूरी से चली है और पेड़ या किसी अन्य जगह से टकराने के बाद कार की तरफ मुड़ी और विंडस्क्रीन पर लग गई।
यह इलाका जियामऊ या मार्टिनापुरवा भी हो सकता है। पहले यह आशंका जताई जा रही थी कि गोली करीब दो किलोमीटर दूर कैंट क्षेत्र स्थित आर्मी की फायरिंग रेंज से आई है।
ऑटोमेटिक राइफलों की पुलिस ने शुरू की पड़ताल
डीआईजी ने बताया कि हजरतगंज और आसपास के इलाकों में ऑटोमेटिक राइफलों की पड़ताल शुरू कर दी गई है। लाइसेंसी शस्त्रधारकों का रिकॉर्ड निकलवाकर उसमें से ऑटोमेटिक रायफल वालों को चिन्हित किया जा रहा है।
हो सकता है किसी के घर पर हर्ष फायरिंग के दौरान गोली चली और कहीं दूसरी जगह से छिटककर कार में लगी हो। ऑटोमेटिक रायफलधारकों के असलहों की बैलिस्टिक जांच भी कराने की तैयारी की जा रही है।
लामार्ट के आसपास अक्सर एयरगन से होती है फायरिंग
लामार्टीनियर कॉलेज के आसपास अक्सर लड़के एयरगन से फायरिंग करते हैं। बीती 28 फरवरी को कुछ लड़कों ने जंगली इलाके में पेड़ों पर लटके फलों को निशाना बनाते हुए एयरगन से फायर किए थे। इसकी सूचना पाकर पुलिस मौके पर पहुंची तो लड़के भाग गए। इसके अलावा अक्सर सूनसान ओर जंगली इलाके में फायरिंग की घटनाएं प्रकाश में आती रहती हैं।
चलते वाहन से नहीं बनाया गया निशाना
घटनास्थल के वक्त जस्टिस की कार के आसपास और आगे-पीछे दूसरा कोई वाहन नहीं था। इससे यह आशंका खत्म हो गई कि चलते हुए वाहन में बैठे किसी शख्स ने जस्टिस की कार को निशाना बनाया। न ही दूर-दूर तक कोई बिल्डिंग नजर आ रही थी।
कार में पत्नी के साथ बैठे थे जस्टिस, बाल-बाल बचे
जस्टिस यूके धवन कार में पत्नी के साथ बैठे थे। ड्राइवर अखिलेश ने बताया कि उसके बगल में गनर दानवीर था। जस्टिस पिछली सीट के बायीं तरफ बैठे थे जबकि उनकी पत्नी दायीं तरफ थीं। गोली ठीक बीच में गिरने से दोनों बाल-बाल बच गए। विंड स्क्रीन पर गोली ठीक बीच में लगी थी जो ड्राइवर और गनर के बीच से होती हुई, पीछे चली गई।
मामले पर डीआईजी रेंज आरकेएस राठौर का कहना है कि फायर किसी बड़े असलहे से हुआ है। घटनास्थल के आसपास रहने वाले सभी लोगों के लाइसेंसी असलहों का ब्यौरा निकलवा लिया गया है। इनके असलहों की जांच कराई जा रही है। फॉरेंसिक टीम के एक्सपर्ट भी जांच कर रहे हैं। हम जल्द ही घटना की तह तक पहुंच जाएंगे।
फॉरेंसिक डॉयरेक्टर एसबी उपाध्याय कहते हैं, हम दूरी, एंगल और बुलेट की स्पीड देख रहे हैं। यह भी देखा जा रहा है कि गोली सीधे आई है या छिटककर कार के विंडस्क्रीन पर लगी है। कुछ बिंदु पर छानबीन की जरूरत है जिसके बाद रिपोर्ट बनाई जाएगी।
जस्टिस यूके धवन ने मामले पर कहा कि मेरी किसी से कोई दुश्मनी नहीं है। मुझे लगता है कि किसी ने जानबूझकर गोली नहीं चलाई होगी। हो सकता है कि आसपास किसी ने फायरिंग की हो और गोली मेरी कार में लग गई हो।