लखनऊ। फर्जी मार्कशीट से सरकारी नौकरी हासिल किए जाने की दिशा में भी गोमतीनगर पुलिस जांच कर रही है। गिरोह वर्ष 2021 से करीब 1500 लोगों को 25 विश्वविद्यालयों की फर्जी मार्कशीट और डिग्री बेच चुका है। पुलिस के लिए इन्हें खरीदने वालों से संपर्क करना चुनौती भरा है।
गिरोह के मास्टर माइंड अयोध्या के सत्येंद्र द्विवेदी, उन्नाव के अखिलेश कुमार और लखीमपुर खीरी के ईशानगर के सौरभ शर्मा को जनेश्वर पार्क के पास से शनिवार को गिरफ्तार किया था। इनके पास से विश्वविद्यालयों की 923 फर्जी मार्कशीट मिली थीं।
आवेदकों के जांचे जाएंगे दस्तावेज
पुलिस सूत्रों के मुताबिक टीमें निजी के साथ सरकारी विभागों में वर्ष 2021 से अब तक नौकरी के लिए आवेदन करने वालों के दस्तावेज जांचेंगी। ऐसे विद्यार्थियों की भी जांच होगी, जिन्होंने आवेदन तो किया पर किसी कारणवश उनकी नौकरी नहीं लग सकी। पुलिस सभी सरकारी विभागों और निजी कंपनियों से संपर्क करेगी। सरकारी विभागों में नौकरी के लिए आए दस्तावेज के कई तरह के सत्यापन होते हैं। इन्हें कानूनी प्रक्रिया से भी गुजरना पड़ता है। ऐसे में फंसने की आशंका अधिक रहती है। अनुमान है कि इस डर से अधिकतर छात्रों ने प्राइवेट नौकरी में फर्जी मार्कशीट का इस्तेमाल किया होगा।
सामान की सप्लाई से भी करोड़ों कमाए
पुलिस ने बताया कि आरोपियों ने फर्जीवाड़ा कर करीब 15 करोड़ रुपये कमाए। सत्येंद्र व उसके साथी फर्जी मार्कशीट बनाने में इस्तेमाल होने वाला कागज व अन्य उपकरणों की सप्लाई भी करते थे। इससे भी करोड़ों की कमाई की। एसीपी ने बताया कि गोमतीनगर पुलिस और पूर्वी क्राइम टीम हर पहलू पर जांच कर रही है। जल्द पूरे गिरोह को पकड़ा जाएगा।