पश्चिमी यूपी में सांप्रदायिक तनाव की घटनाओं में तेजी आई है। अपराधों पर अंकुश नहीं लग पा रहा है। पुलिसकर्मियों पर संगीन आरोपों के मामले भी बढे़ हैं। सूबे की कानून व्यवस्था पर उठते इन सवालों के बीच अमर उजाला ने डीजीपी जगमोहन यादव से सीधी बात की। उन्होंने दावा किया कि सभी मामलों को गंभीरता से लिया जा रहा है और हालात काबू में हैं। पेश हैं बातचीत के अंश....
प्रश्न- पुलिस की छवि लगातार गिर रही है। कोई सुधार नहीं हो रहा?
जवाब : मैंने पहले ही कहा था कि निकम्मे पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई होगी। ऐसे पुलिसकर्मियों की सूची तैयार की जा रही है, जिनका कामकाज संतोषजनक नहीं है। दागी पुलिसकर्मियों के बारे में भी ब्यौरा जुटाया जा रहा है। दागियों व खराब काम करने वालों को फील्ड ड्यूटी से हटाया जाएगा। बेहतर काम करने वाले फील्ड में रहेंगे तो पुलिस की छवि अपने आप ही सुधरेगी और नतीजे भी अच्छे आएंगे।
प्रश्न- जिलों की बात छोड़िए, राजधानी में भी अपराध खासा बढ़ा है। इसकी रोकथाम के लिए क्या कर रहे हैं?
जवाब : हां, यह सही है कि कुछ घटनाएं हुई हैं। परंतु यह कहना सही नहीं होगा कि अपराध बढ़ गए हैं। जो घटनाएं हुई हैं, उन पर कार्रवाई की जा रही है। सनसनीखेज वारदातों का जल्दी ही खुलासा होगा। इसमें लखनऊ की घटनाएं भी शामिल हैं।
प्रश्न- पश्चिमी यूपी में सांप्रदायिक तनाव की आए दिन कोई न कोई घटना सामने आ रही है। हालात कैसे सही होंगे?
जवाब :वेस्ट यूपी में कुछ सांप्रदायिक घटनाएं हुई हैं यह भी सही है, लेकिन स्थिति नियंत्रण में है। जहां भी ऐसी कोई बात सामने आती है, त्वरित कार्रवाई की जा रही है। मेरठ जोन को अतिरिक्त फोर्स दिया जा चुका है। पश्चिम के सभी जिलों के कप्तानों, रेंज व जोन के प्रभारियों से सीधा संपर्क कर मैं खुद जरूरी हिदायत दे रहा हूं। यह बता दिया गया है कि किसी छोटी घटना को भी अनदेखा न किया जाए।