महिलाओं को हिंसा से आजादी कैसे मिले? यह सवाल इस समय सभी को चिंतित कर रहा है।
इस सवाल का जवाब को तलाशने के लिए बुधवार को सिटी मॉन्टेसरी स्कूल ने कानपुर रोड स्थित शाखा में पांचवीं इंटरनेशनल मीडिया कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया।
इसका विषय ‘फ्रीइंग वुमन फ्रॉम वॉयलेंस’ रखा गया। कार्यक्रम में देश विदेश से मेहमान जुटे और अपने विचार रखे।
वरिष्ठ पत्रकार प्रभु चावला ने प्रमुख वक्तव्य दिया। उन्हाेंने कहा कि एनडीए की पिछली सरकार के दौरान विदेश सचिव की नियुक्ति होनी थी।
मालूमात की तो पता चला कि जो महिला अधिकारी इस पद के योग्य हैं, उन्हें पूरी लॉबिंग करके 14 साल देश में नियुक्ति ही नहीं मिली।
वे पूरे समय विदेशों में नियुक्त रहीं और राजनीतिक हलकों में उनकी योग्यता के बारे में कोई जानता ही नहीं है।
यह पूरा एक सिस्टम है जो ऊपर से लेकर नीचे तक काम करता है ताकि महिलाएं उन पदों पर न आ सकें जहां वे निर्णय लेने की हद तक सिस्टम को प्रभावित कर सकती हैं।
प्रभु चावला ने कहा कि 1800 महिला आईएएस हैं, लेकिन गृह सचिव वे नहीं हो सकतीं। देश में 30 डीजीपी हैं, लेकिन 5 भी महिला नहीं हैं।
राजनीति में 33 प्रतिशत आरक्षण नहीं मिल रहा है तो न सही, क्यों नहीं अमित शाह, मुलायम सिंह आदि अपनी पार्टियों में 33 प्रतिशत पदों पर और प्रत्याशियों में महिलाओं को चुनते हैं?
प्रभु चावला ने कहा कि जयललिता, ममता बनर्जी, मायावती जैसी नेता अपनी पार्टियां चला रही हैं क्योंकि उन्हीं के नाम से पार्टियों का अस्तित्व है।
कार्यक्रम के दौरान विशेष सेशन भी आयोजित किए गए। इनमें यूनाइटेड नेशंस के सूचना अधिकारी राजीव चंद्रन, वरिष्ठ पत्रकार जावेद नकवी व श्रीपाल शक्तावत, ब्रिटिश हाई कमीशन के प्रेस व संचार विभाग की उप-प्रमुख किटी तवकले, सामाजिक कार्यकर्ता व सपा अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव की बहू अपर्णा यादव, आदि शामिल रहे।
इससे पहले कार्यक्रम का शुभारंभ सीएमएस के संस्थापक डॉ. जगदीश गांधी द्वारा मुख्य अतिथियों प्रदेश के स्वास्थ्य अहमद हसन और पिछड़ा वर्ग कल्याण व विकलांग कल्याण मंत्री अंबिका चौधरी के अभिनंदन से किया गया। वहीं विद्यार्थियों ने कई रंगारंग कार्यक्रम प्रस्तुत किए। प्रो. गीता जी. किंगडन ने कार्यक्रम की रूपरेखा रखी।