-उलमा-ए-किराम जलसों में इस विषय पर खिताब करें और लोगों को इसके नुकसान से जागरूक करें।
-अधिक से अधिक महिलाओं के इज्तेमा हों और उनमें सुधारात्मक विषयों के साथ चर्चा करें।
-मस्जिदों के इमाम जुमा के खिताब, कुरआन और हदीस के दर्स में इस विषय पर चर्चा करें और लोगों को बताएं कि उन्हें अपनी बेटियों को कैसे प्रशिक्षित करना चाहिए ताकि ऐसी घटनाएं न हों।
-आमतौर पर रजिस्ट्री कार्यालय में शादी करने वाले लड़के या लड़कियों के नामों की सूची पहले ही जारी कर दी जाती है। धार्मिक संगठन, संस्थाएं, मदरसे के शिक्षक गणमान्य लोगों के साथ उनके घरों में जाकर समझाएं।
- लड़कों और विशेषकर लड़कियों की शादी में देरी न हो। समय पर शादी करें। क्योंकि शादी में देरी भी ऐसी घटनाओं का एक बड़ा कारण है।
-निकाह सादगी से करें। इसमें बरकत भी है, नस्ल की सुरक्षा भी है और अपनी कीमती दौलत को बर्बाद होने से बचाना भी है।