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Lucknow News: बंटने के बजाय छह माह से कमरे में बंद थीं कार्य पुस्तिकाएं

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लखनऊ। सरकारी स्कूलों के बच्चों की बौद्धिक गुणवत्ता परखने के लिए निशुल्क किताबों के साथ कार्य पुस्तिकाएं भी दी जाती हैं। मोहनलालगंज के प्राथमिक विद्यालय नेवाजखेड़ा में बच्चों में बांटे जाने के बजाय ये किताबें छह महीने तक कमरे में बंद रहीं। प्रधानाध्यापक ने सर्दी की छुट्टी में मौका मिलते ही 11 रुपये प्रति किलो के हिसाब से दो क्विंटल किताबें कबाड़ में बेच दीं। बुधवार को जांच करने पहुंचे खंड शिक्षा अधिकारी सुशील कुमार को यह जानकारी मिली।
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बीईओ के पहुंचते ही ग्रामीणों ने विद्यालय को घेर लिया और प्रधानाध्यापक पर कार्रवाई की मांग की। बीईओ ने किसी तरह उन्हें समझाया। अमर उजाला में बुधवार के अंक में खबर प्रकाशित होने के बाद विभाग के उच्च अधिकारियों ने भी मामले पर संज्ञान लिया है। बीईओ ने रसोईया कर्मचारियों के साथ शिक्षामित्र अशोक का भी बयान दर्ज किया।

इससे पहले प्रधानाध्यापक ने कहा था कि मंगलवार को शिक्षामित्र ने स्कूल खोला था, जिससे अशोक ने इनकार किया। उन्होंने कार्य पुस्तिकाएं न बंटने को प्रधानाध्यापक रविंद्र गुप्ता की लापरवाही बताया। इससे पहले प्रधानाध्यापक ने इसे भी शिक्षामित्र की साजिश बताया था।
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कबाड़ी को किताबें बेचे जाने का मामला मंगलवार को प्रकाश में आया था। कबाड़ी वाला जैसे ही विद्यालय से ठेलिया लेकर निकला, ग्रामीणों ने उसे घेर लिया था। बोरियां खोलने पर उसमें नई किताबें निकली थीं। ग्रामीणों ने इसका वीडियो भी बनाया था। शिक्षामित्र ने बीईओ को बताया कि प्रधानाध्यापक ने कार्य पुस्तिकाएं वितरित किए जाने की झूठी सूचना भेजी थी। पिछले वर्ष भी कई किताबें नहीं बांटी गई थीी।





कबाड़ी से वापस नहीं ली गईं किताबें

बेची गई कार्य पुस्तिकाएं अभी तक कबाड़ी से वापस नहीं ली गई हैं। बीईओ सुशील कुमार ने बताया कि कबाड़ी वाले का बयान दर्ज किया गया है। किताबें भी वापस मांगी गई हैं। बीएसए विपिन कुमार का कहना है कि मामले की जांच रिपोर्ट बीईओ ने दी है। आरोप सही पाए गए हैं। आरोपी प्रधानाध्यापक पर कार्रवाई होगी।
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