आईएनएस गोमती की कमांड संभालने वाले कैप्टन सुदीप मलिक ने बताया कि 16 अप्रैल 1988 को आईएनएस गोमती तत्कालीन रक्षामंत्री केसी पंत की ओर से मुंबई के मझगांव डॉकयार्ड से नौसेना में कमीशन हुआ था। यह गोदावरी श्रेणी का तीसरा और ऐसा पहला जहाज है, जिसमें सोवियत संघ व पश्चिमी देशों की तकनीक का इस्तेमाल हुआ है। ऑपरेशन रेनेबो, ऑनरेशन द्वीप ऑफ लक्षद्वीप, ऑपरेशन नेवला में इसने अहम योगदान निभाया। कोंकण क्षेत्र में वर्ष 2005 में आई बाढ़ में भी इसने राहत पहुंचाने का काम किया।
उपकरण लाने के लिए हुआ एमओयू
पर्यटन एवं संस्कृत विभाग के प्रमुख सचिव मुकेश मेश्राम का कहना है कि आईएनएस गोमती नौसेना से सेवामुक्त हो गया है। इसे लखनऊ लाकर नदी में डिस्प्ले करना मुश्किल है। लिहाजा छतर मंजिल परिसर में ओपेन एयर म्यूजियम बनाकर वहां जहाज के हिस्सों को प्रदर्शित किया जाएगा। जहाज के उपकरण लाने के लिए सरकार व नौसेना के बीच एमओयू हुआ है।