कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय खुजौली।
लखनऊ। कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय की छात्राओं को जमकर पीटा जाता था। अब इसकी पुष्टि मेडिकल रिपोर्ट में भी हो गई है। कई छात्राओं के हाथ-पैर में चोटों के निशान मिले हैं। पुलिस ने मेडिकल रिपोर्ट को केस की विवेचना में शामिल कर लिया है। उधर, पुलिस ने आरोपी वार्डन सुधा यादव को पूछताछ के लिए नोटिस जारी कर बुलाया है।
मोहनलालगंज के खुजौली में स्थित आवासीय विद्यालय की छात्राओं ने शनिवार को समाधान दिवस पर डीएम से शिकायत की थी। आरोप लगाया था कि वार्डन सुधा यादव उन्हें शारीरिक व मानसिक रूप से प्रताड़ित करती हैं। डीएम के निर्देश पर गठित जांच कमेटी ने आरोप सही पाए थे। रविवार को वार्डन पर केस दर्ज किया गया था। सोमवार को पुलिस ने आठ छात्राओं का मेडिकल कराया। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, मेडिकल रिपोर्ट में तीन से चार छात्राओं के हाथ-पैर में चोटों की पुष्टि हुई है। ये चोटें डंडे आदि से मारने से आई हैं। पुलिस ने इन सभी छात्राओं के बयान भी दर्ज कर लिए हैं।
धमकी देकर कहा...शिकायत की तो स्कूल से निकल जाओगी
पुलिस को दिए गए बयान में छात्राओं ने बताया कि उनसे शौचालय तक साफ कराया जाता है। न करने पर मारा-पीटा जाता था। जब उन्होंने विरोध किया तो वार्डन ने धमकी दी थी कि अगर कहीं किसी से शिकायत की तो स्कूल से निकाल दी जाओगी। दूसरे स्कूल में एडमिशन भी नहीं मिलेगा। दहशत की वजह से वह इतने दिन उत्पीड़न सहती रहीं।
अभिभावकों तक पहुंची थी छात्राओं की आपबीती
पुलिस की जांच में सामने आया है कि काफी समय से छात्राओं को प्रताड़ित किया जा रहा था। कुछ शिक्षकों व कर्मचारियों ने छात्राओं के कई वीडियो बनाए, जिसमें वह आपबीती बता रही थीं। इन वीडियो को छात्राओं के अभिभावकों को भेजा गया। तब अभिभावकों ने स्कूल में संपर्क किया। विरोध करने पर उनकी नहीं सुनी गई। आखिर में छात्राओं ने डीएम से गुहार लगाई। तब कार्रवाई हुई।
फुटेज की जांच जारी....
जांच टीम ने रविवार को प्राथमिक जांच रिपोर्ट डीएम को सौंप दी थी। विस्तृत जांच जारी है। छात्राओं ने आरोप लगाया था कि रात में गाड़ियों से लोग स्कूल में आते-जाते रहते थे। ये आरोप बेहद गंभीर है। इसलिए जांच टीम पूरी फुटेज बारीकी से देख रही है। सूत्रों के मुताबिक, अभी तक ये आरोप सही नहीं पाया गया है। कोई भी बाहरी शख्स स्कूल परिसर के भीतर आते नहीं दिखा है। फिर भी जांच टीम हर एक पहलू की तफ्तीश कर रही है, जिससे किसी तरह की कोई कमी न रह जाए। फाइनल जांच रिपोर्ट प्रशासन शासन को भेजेगा।