एनसीईआरटी से महंगी हैं प्राइवेट पब्लिकेशन की किताबें-बॉक्स
जानकीपुरम स्थित एक निजी स्कूल अभिभावक बताते हैं कि प्राइवेट पब्लिकेशन की किताबों की कीमत एनसीईआरटी पाठ्यक्रम से अधिक महंगी हैं। यदि अभिभावक स्कूल में किताबों लिस्ट की सूची मांगते हैं तो उन्हें स्कूल की ओर से मौखिक तौर पर दुकानदार के बारे में जानकारी दी जाती है। कहा जाता है कि जैसे दुकानदार से स्कूल व क्लास बताएंगे तो किताबें मिल जाएंगी।
बजट पर पड़ रहा असर-बॉक्स
इस बारे में अभिभावक अंजली वैश्य, मीनू पांडेय कहती हैं कि स्कूल में बच्चों को पढ़ाना बहुत मुकिश्ल हो रहा है। बच्चे की फीस, स्टेशनरी, वाहन शुल्क, यूनिफार्म के खर्च ने बजट गड़बड़ कर दिया है। कमाई का एक तिहाई हिस्सा पढ़ाई पर खर्च हो रहा है।
केस:1 - इस बार 40 हजार का बढ़ गया बोझ-बॉक्स
विकास नगर स्थित एक निजी स्कूल के अभिभावक नीलम मौर्या ने बताया उनके दो बच्चे एक साथ पढ़ते हैं। पिछले साल की तुलना में इस बार दोनो बच्चों पर कॉपी, किताब अन्य सभी व्यवस्थाएं करने में 40 हजार रुपये का अधिक खर्च आ गया।
केस:2 - इस बार फीस के साथ कोर्स की कीमत भी बढ़ी-बॉक्स
अलीगंज स्थिति एक निजी स्कूल के अभिभावाक अतुल वर्मा ने बताया कि इस बार स्कूल की फीस बढ़ोतरी के साथ-साथ कॉपी किताब की बढ़ी कीमतों ने घर के बजट पर असर डाला है। इस पर सरकार को ध्यान देना चाहिए।
हर साल की तरह इस बार भी कॉपी किताबों के दाम बढ़े हैं। जब हमें बढ़ी कीमत देनी पड़ती है तो अभिभावकों को भी महंगे दामों में बेचा जाता है।
-दीपक स्टेशनरी व कॉपी किताब कारोबारी
अभिभावकों को अलर्ट रहने की जरूरत है। यदि कोई भी स्कूल प्रबंधक निर्धारित दुकानदार से कॉपी किताब खरीदने के लिए कहता है तो उसे छुपाने की बजाय लिखित शिकायत करनी चाहिए। हमारे यहां भी शिकायत दर्ज कराई जा सकती है कार्रवाई होगी।
-राकेश कुमार जिला विद्यालय निरीक्षक