लखनऊ में हजरतगंज के प्राग नारायण रोड स्थित राजकीय बालगृह शिशु में स्टाफ की लापरवाही ने रविवार सुबह एक मासूम की जान ले ली। फूल सा खेलता मुस्कुराता एक साल का मासूम बीते शनिवार रात करीब आठ बजे अचानक पालने से गिरा और स्टाफ ने उसे देखा तक नहीं कि उसे कहां और कितनी चोट लगी है।
मासूम को चुप कराया और सुला दिया। सुबह करीब सात बजे जब बच्चे की हालत बिगड़ी तो उसे सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया। यहां इलाज के दौरान मौत हो गई। स्टाफ नर्स व सहायिकाओं की यह लापरवाही सीसीटीवी में कैद हो गई है। महिला एवं बाल कल्याण विभाग ने अब स्टाफ नर्स और सहायिकाओं की सेवा समाप्त करने का निर्देश दिया है। वहीं जिलाधिकारी ने मजिस्ट्रेटी जांच के आदेश दे दिए हैं।
तबीयत बिगड़ी तो ले गए अस्पताल
पालने से गिरकर चोटिल होने के बाद रविवार सुबह बच्चे की तबीयत बिगड़ गई। वह दर्द से कराह रहा था। न कुछ खा रहा था, न पी रहा था। ऐसे में बच्चे को लेकर नर्स व अन्य स्टाफ सिविल अस्पताल पहुंचे, लेकिन उसकी मौत हो गई। डॉक्टरों के मुताबिक, बच्चे के गिरने से उसके सिर में चोट आ गई थी।
दो माह में जा चुकी हैं चार जानें
जिला प्रोबेशन अधिकारी सुधाकर शरण पांडेय ने बताया कि सीसीटीवी फुटेज से स्टाफ नर्स नीलम व अन्य तीन सहायिकाओं की पूरी लापरवाही साफ दिख रही है। बच्चा पालने में हंस खेल रहा था। स्टाफ भी रात में मौजूद था। इस दौरान बच्चा पालने से जमीन पर गिरा तो स्टाफ उसे उठाया है लेकिन थपकी देकर सुला दिया।
बच्चे को चोट कहां लगी इसे गंभीरता से नहीं लिया गया। विभाग ने चारों महिला स्टाफ की सेवा समाप्त करने का निर्देश दे दिया है। साथ ही डीएम ने घटना की मजिस्ट्रेटी जांच के आदेश दिए हैं। डीपीओ ने माना कि इसके पूर्व की घटनाएं जिसमें मासूम बच्चों की जाने गई हैं, इसमें भी स्टाफ की लापरवाही ही समाने आई। स्टाफ को सेवा से मुक्त किया जाएगा।
दो माह में जा चुकी हैं चार जानें
बीते अगस्त से अब तक कुल चार बच्चों की जान स्टाफ की लापरवाही से जा चुकी है। बच्चों के बीमार होने पर उन्हें समय से उपचार न देकर और लापरवाही में गिरने से तीन और बच्चे अपनी जान गंवा चुके हैं। बच्चे को अस्पताल में भर्ती कराने में देरी जानलेवा साबित हो रही है। यह सभी बच्चे छह माह से एक साल के बीच के हैं।
बालगृह में स्थायी डॉक्टर तक नहीं
प्रतीकात्मक तस्वीर
राजकीय बालगृह शिशु में स्थायी डॉक्टर तक की नियुक्ति नहीं है। महिला एवं बाल कल्याण विभाग के एक डॉ. सुदर्शन ही सभी संस्थानों के बच्चों को देखते हैं। अभी दो दिन पहले ही इन्हें राजकीय बालगृह शिशु का अतिरिक्त कार्यभार दिया गया, जबकि बच्चों की संख्या को देखते हुए स्थायी डॉक्टर की जरूरत है।
वहीं बालगृह शिशु के दत्तक गृह की 10 बच्चे रखने की क्षमता है, जबकि यहां अभी 28 नवजात व 36 बच्चे दो साल के अंदर के हैं। इनके लिए विभाग एक स्टाफ नर्स व तीन सहायिकाओं की ड्यूटी लगाता है। इसी तरह रात में भी यही हाल रहता है।
तीन बच्चे अब भी अस्पताल में भर्ती
राजकीय बालगृह शिशु के स्टाफ व व्यवस्था को देखते हुए तीन नवजातों को तीन माह से निजी अस्पताल में ही रखा गया है। बाल कल्याण समिति की सदस्य संगीता शर्मा बताती हैं कि बालगृह के लिए ऑर्डर के बावजूद बच्चों को अभी कपूरथला स्थित एक निजी अस्पताल में रखा गया है।
अधीक्षिका छुट्टी पर, कर्मचारियों की मनमानी
राजकीय बालगृह शिशु की अधीक्षिका मंजू वर्मा छह माह पहले नियुक्त की गईं। तैनाती के बाद से वह दो बार लंबी छुट्टी पर चली गईं। पिछले दस दिनों से वह छुट्टी पर हैं। इसके कारण यहां स्टाफ मनमानी करने लगता है।