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नव्य अयोध्या में इंडोनेशिया, मलेशिया, मॉरीशस, थाईलैंड, कोरिया, श्रीलंका जैसे देशों का बनेगा अतिथिगृह

Mon, 01 Mar 2021 07:11 PM IST
पंकज श्रीवास्‍तव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अयोध्या
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अयोध्या (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला
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राममंदिर निर्माण के समानांतर ही रामनगरी का विकास उसकी गरिमा के अनुरूप करने का काम शुरू हो चुका है। इसी क्रम में रामनगरी में नव्य अयोध्या की योजना को आकार देने की कवायद में भी तेजी आई है। 1200 एकड़ जमीन में नव्य अयोध्या को आकार दिया जाना है। विभिन्न पंथ, धर्म के मठ, मंदिर व आश्रम नव्य अयोध्या की शोभा बढ़ाएंगें तो वहीं कई देशों के अतिथिगृह भी बनाने की योजना बन रही है। नव्य अयोध्या के लिए जमीन अधिग्रहण हेतु नोटिफिकेशन भी जारी हो चुका है।
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रामनगरी अयोध्या में तीन गांवों शाहनेवाजपुर, मांझा बरहटा, तिहुरा मांझा की 1200 एकड़ जमीन को अधिग्रहीत कर उस पर नव्य अयोध्या को आकार देने की तैयारी है। जमीन अधिग्रहण के लिए आवास विकास विभाग द्वारा नोटिफिकेशन भी जारी किया जा चुका है। नव्य अयोध्या में होटल, धर्मशाला, मठ, मंदिर आदि का निर्माण किया जाना है। इसी बीच ऐसे देश जहां सांस्कृतिक विरासत के तौर श्रीराम पूजित-प्रतिष्ठित हैं उनके लिए अतिथिगृह का निर्माण किया जाएगा। महापौर ऋषिकेश उपाध्याय का कहना है कि कई देशों के अतिथिगृह का निर्माण नव्य अयोध्या में किया जाएगा। कहा कि विश्व के सैकड़ों देशों में राम संस्कृति प्रचारित-प्रसारित है। 40 से अधिक देशों में रामलीला का मंचन किया जाता है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वार शुरू किए दीपोत्सव में अब तक दर्जनों देशों की रामलीलाएं हो चुकी हैं। कहा कि ऐसे देश जहां सांस्कृतिक विरासत के रूप में अथवा प्रवासी भारतीयों के माध्यम से श्रीराम पूजित-प्रतिष्ठित हैं, उन देशों का अतिथिगृह अयोध्या में बनाया जाएगा। जो देश अतिथि गृह बनाने की इच्छा व्यक्त करेंगें उनके लिए व्यवस्था की जाएगी। बताया कि नव्य अयोध्या में नेपाल, श्रीलंका, सूरीनाम,फिजी, केन्या, कनाडा, इंडोनेशिया, मलेशिया, त्रिनिडाड, मॉरीशस, थाईलैंड, कोरिया जैसे देशों के लिए आधुनिक सुविधाओं से युक्त अतिथि गृह का निर्माण किए जाने की तैयारी है। इसके लिए आवास विकास विभाग ने काम शुरू कर दिया है।
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रामघाट पर बनेगा वेस्ट एग्रीगेशन सेंटर
महापौर ऋषिकेश उपाध्याय ने बताया कि रामनगरी को प्रदूषण मुक्त करने के लिए सॉलिड और लिक्विड वेस्ट को ट्रीट करने वाली तकनीकि का इस्तेमाल किया जाएगा। इसके लिए रामघाट पर वेस्ट एग्रीगेशन सेंटर का निर्माण किया जाना है। इस एग्रीगेशन सेंटर में कचरे को कंपोस्ट किया जाएगा। इससे शहर की गंदगी साफ करने का एक स्थायी मॉडल मिल सकेगा। उन्होंने यह भी बताया कि रामनगरी की आबोहवा प्रदूषण से मुक्त रहे इसलिए इलेक्ट्रिक वाहन चलाए जाने की भी योजना है। बताया कि रामकथा पार्क से इलेक्ट्रिक बसें चलाई जाएंगी। जो भक्तों को रामलला सहित रामनगरी के अन्य पौराणिक स्थलों तक लें जाएंगी।
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