यूं तो बसपा सुप्रीमो मायावती सपा के साथ मिलकर चुनाव लड़ने को तैयार नहीं है लेकिन तृणमूल कांग्रेस की अध्यक्ष व पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी दोनों दलों को एक मंच पर ला सकती हैं। राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो कांग्रेस को दरकिनार कर अगर तीसरा मोर्चा बना तो ममता बनर्जी उसकी निर्विवाद नेता बन सकती हैं। पहले उन्हें मायावती से चुनौती मिलने के जो समीकरण बने थे, वो बीते चुनावों में बसपा के लगातार घटते जनाधार की वजह से ध्वस्त हो चुके हैं। अब बसपा को अपना खोया हुआ जनाधार वापस पाने के लिए दूसरे दलों का सहारा लेना पड़ सकता है।
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